न्यूयार्क. एआई की बढ़ती कंप्यूटिंग जरूरतों के बीच गूगल अब डाटा सेंटर को पृथ्वी से बाहर ले जाने की तैयारी कर रही है। अमेरिकी कंपनी अपने प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत अंतरिक्ष की कक्षा में एआई कंप्यूटिंग की संभावनाओं का परीक्षण करेगी। इसके लिए अंतरिक्ष में परिक्रमा कर रहे उपग्रहों में गूगल के ट्रिलियम टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट यानी टीपीयू लगाए जाएंगे। कंपनी अगले माह पहला आर्बिटल टेस्ट करने जा रही है। स्पेसएक्स के रॉकेट के जरिये एक अक्टूबर को प्रोटोटाइप उपग्रह लांच किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग को सुरक्षित और व्यावहारिक तरीके से संचालित किया जा सकता है या नहीं।
एलन मस्क का स्वागत और भविष्य की दृष्टि
स्पेसएक्स और टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने भी इस परियोजना का स्वागत किया है। एएनआई के अनुसार उन्होंने गूगल का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि भविष्य में कंप्यूटिंग का शत प्रतिशत काम अंतरिक्ष में स्थानांतरित हो सकता है। गूगल के अनुसार पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों को नियमित रूप से सूर्य की रोशनी मिलती है। कंपनी का अनुमान है कि इससे वे धरती पर मौजूद प्रतिष्ठानों की तुलना में आठ गुना तक अधिक सौर ऊर्जा हासिल कर सकते हैं। ऐसे में बढ़ती एआई जरूरतों के लिए अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग भविष्य में बिजली, जमीन और कूलिंग जैसी चुनौतियों का विकल्प बन सकती है।
रेडिएशन और गर्मी की चुनौतियां
अंतरिक्ष में एआई चिप्स के संचालन के सामने रेडिएशन और तापमान बड़ी चुनौती हैं। गूगल के अनुसार उसकी चिप्स के वाइब्रेशन टेस्ट और रेडिएशन एक्सपोजर प्रयोग कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय डेविस की क्राकर न्यूक्लियर लैबोरेटरी में किए गए। शुरुआती परीक्षणों में ट्रिलियम टीपीयू के अगले पांच साल के रेडिएशन प्रभाव झेलने में सक्षम होने के संकेत मिले हैं। एआई कंप्यूटिंग के दौरान पैदा होने वाली गर्मी को अंतरिक्ष में निकालना भी आसान नहीं होगा क्योंकि वहां हवा नहीं है। इसके लिए गूगल हीट पाइप और रेडिएटर जैसी तकनीकों की संभावनाएं तलाश रही है। कंपनी 2027 में दो उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर उनके बीच लेजर संचार का परीक्षण भी करेगी।
पहला परीक्षण और साझेदारी
गूगल ने पिछले साल प्रोजेक्ट सनकैचर की घोषणा की थी। शुरुआती मिशन उपग्रह कंपनी प्लैनेट के साथ साझेदारी में तैयार किया गया है। इसे स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिये कक्षा में पहुंचाया जाएगा। परीक्षण के दौरान ट्रिलियम टीपीयू को रेडिएशन, अत्यधिक तापमान, कंपन व अंतरिक्ष उड़ान के दौरान पड़ने वाले दबाव जैसे हालात में परखा जाएगा। कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य एआई कंप्यूटिंग हार्डवेयर वाले कई उपग्रहों को आपस में जोड़कर ऐसा आर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है जो बढ़ते एआई वर्कलोड को संभाल सके।
धरती पर संसाधन बचत की संभावना
अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग से धरती पर बिजली और पानी की खपत कम होने की उम्मीद है। डाटा सेंटर वर्तमान में भारी मात्रा में ऊर्जा और कूलिंग वॉटर की खपत करते हैं। सूर्य की निरंतर ऊर्जा और अंतरिक्ष के वातावरण का लाभ उठाकर गूगल इन चुनौतियों का समाधान तलाश रहा है। उपग्रहों के बीच हाई-बैंडविड्थ लेजर लिंक के जरिये डाटा व कंप्यूटिंग वर्कलोड साझा करने की योजना है। अगर परीक्षण सफल रहे तो भविष्य में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष में स्थानांतरित हो सकता है जिससे पर्यावरणीय दबाव कम होगा। तकनीकी बाधाओं के बावजूद यह परियोजना भविष्य की दिशा तय कर सकती है।