कश्मीरी पश्मीना शॉल को दुनिया की सबसे बेहतरीन और कीमती शॉलों में गिना जाता है। यह शॉल अपनी असाधारण कोमलता, हल्केपन और गर्माहट के लिए जानी जाती है। पश्मीना ऊन हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली विशेष नस्ल की बकरियों से प्राप्त होती है, जो इसे बेहद दुर्लभ और खास बनाती है। कानी पश्मीना शॉल इस परंपरा का सबसे उत्कृष्ट रूप मानी जाती है, जिसमें कला और धैर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
प्रधानमंत्री मोदी और कानी शॉल का खास रिश्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कश्मीर की संस्कृति और हस्तकला से विशेष लगाव है। वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में कानी पश्मीना शॉल ओढ़े नजर आ चुके हैं। उनकी यह पसंद न सिर्फ कश्मीर की पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान देती है, बल्कि स्थानीय कारीगरों के लिए भी सम्मान और प्रोत्साहन का कारण बनती है।
मुगल काल से जुड़ा कानी शॉल का इतिहास
कानी शॉल का इतिहास मुगल काल तक जाता है। माना जाता है कि 15वीं शताब्दी में फारसी और तुर्की बुनकर इस बुनाई कला को कश्मीर लेकर आए थे। मुगल बादशाहों और राजघरानों के संरक्षण में यह शॉल शाही परिधान बन गई। समय के साथ यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही और आज कश्मीर की पहचान बन चुकी है।
कानी शब्द का अर्थ और बुनाई की तकनीक
कानी शॉल पश्मीना ऊन से बनाई जाती है और इसकी बुनाई के लिए लकड़ी की छोटी सुइयों का उपयोग होता है, जिन्हें कश्मीरी भाषा में ‘कानी’ या ‘कनिस’ कहा जाता है। इन कनिस के चारों ओर रंगीन धागे लपेटकर शॉल पर जटिल पैटर्न उकेरे जाते हैं। आमतौर पर ये कनिस पूस तुल नामक जंगली लकड़ी से बनाई जाती हैं, जिससे बुनाई में मजबूती और अत्यधिक बारीकी आती है।
कानी पश्मीना शॉल इतनी महंगी क्यों होती है
कानी पश्मीना शॉल की कीमत उसकी मेहनत और समय में छिपी होती है। एक शॉल को पूरा होने में तीन से चार साल तक का समय लग सकता है। इसे बनाने में तीन से चार कुशल कारीगर रोजाना छह से सात घंटे काम करते हैं, फिर भी एक दिन में केवल एक से दो सेंटीमीटर ही बुनाई हो पाती है। इतनी लंबी और श्रमसाध्य प्रक्रिया इसे बेहद मूल्यवान बनाती है।
कीमत और शाही प्रतिष्ठा
कानी पश्मीना शॉल की कीमत उसकी डिजाइन, बुनाई की जटिलता और कारीगरी पर निर्भर करती है। आमतौर पर इसकी कीमत लगभग 13,000 रुपये से शुरू होकर एक लाख रुपये या उससे भी अधिक तक जा सकती है। यही वजह है कि इसे सिर्फ परिधान नहीं, बल्कि एक शाही विरासत और कला का अनमोल खजाना माना जाता है।
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