मध्यप्रदेश में इस समय प्री-मानसून गतिविधियां तेज हैं, लेकिन दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अभी धीमी बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून के 20 से 21 जून के बाद ही पहुंचने की संभावना है। इसके चलते इस सप्ताह झमाझम बारिश का इंतजार और बढ़ सकता है। वहीं ग्वालियर समेत कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मानसून की रफ्तार धीमी, कई राज्यों में ही आगे बढ़ा
मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक सोमवार को मानसून की उत्तरी सीमा सोलापुर, हैदराबाद, भद्राचलम और कोरापुट तक ही स्थिर रही। अगले 4–5 दिनों में इसके महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तक आगे बढ़ने की संभावना है। इससे साफ है कि मध्यप्रदेश में मानसून के आगमन में देरी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार 20-21 जून के बाद पहुंचेगा मानसून
इस वर्ष भी मानसून के आगमन में देरी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि प्रदेश में मानसून 20-21 जून के बाद ही सक्रिय हो पाएगा। पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में भी अधिकतर बार मानसून तय समय से 3 से 10 दिन की देरी से पहुंचा है।
10 वर्षों का मानसून ट्रेंड
आंकड़ों के अनुसार 2016 से 2025 के बीच केवल वर्ष 2020 में मानसून ने 15 जून को मध्यप्रदेश में समय पर दस्तक दी थी, जबकि 2021 में यह सामान्य समय से 5 दिन पहले आ गया था। बाकी वर्षों में मानसून लगातार देरी से पहुंचता रहा है, जिससे इस बार भी यही पैटर्न देखने को मिल रहा है।
प्री-मानसून में कम बारिश, कुछ जिलों में स्थिति बेहतर
1 से 15 जून के बीच प्रदेश में औसतन 29 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्यप्रदेश में 51 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जिसमें अनूपपुर में 68 प्रतिशत और बालाघाट में 82 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं पश्चिमी मध्यप्रदेश में स्थिति थोड़ी बेहतर रही, जहां केवल 12 प्रतिशत कम बारिश हुई।
भोपाल में सामान्य से अधिक वर्षा
भोपाल में प्री-मानसून गतिविधियां अपेक्षाकृत मजबूत रहीं, जिसके चलते यहां सामान्य से 119 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इससे राजधानी क्षेत्र में मौसम सुहावना बना हुआ है, जबकि अन्य जिलों में बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है।
कई जिलों में येलो अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने ग्वालियर सहित कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। आने वाले दिनों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है, लेकिन मानसून की पूर्ण सक्रियता अभी दूर मानी जा रही है।