सूरत में वोटिंग से पहले ही भाजपा के उम्मीदवार मुकेश दलाल ने सोमवार, 22 अप्रैल को चुनाव जीत लिया और जैसे ही ये जानकारी सबके सामने आई कि मुकेश दलाल को निर्विरोध चुन लिया गया है, उन्हें बधाइयां मिलनी शुरू हो गईं। हो भी क्यों ना, मुकेश दलाल पिछले 12 साल में निर्विरोध लोकसभा चुनाव जीतने वाले पहले उम्मीदवार बन गए हैं। साल 1951 से अब तक के चुनाव में बिना किसी चुनावी जंग में उतरे संसदीय चुनाव जीतने वालों की संख्या करीब 35 हो गई है।
इस बार का लोकसभा चुनाव सात चरणों में हो रहा है और पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को संपन्न हो चुका है। चुनाव संपन्न होने से पहले ही बीजेपी ने इस जीत के साथ अपना खाता खोल लिया है। अब फाइनल नतीजे क्या होंगे ये तो किसी को नहीं पता लेकिन मुकेश दलाल की जीत के साथ ही भाजपा ने पहला मुकाम हासिल कर लिया है। सूरत लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर नीलेश कुंभानी चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन डिस्ट्रिक रिटर्निंग ऑफिसर ने प्रथम दृष्टया उनके नामांकन पत्र की जांच में पाया कि प्रस्तावकों के हस्ताक्षर में कुछ गलतियां थीं और इस कारण चुनाव आयोग ने नीलेश कुंभानी का नामांकन रद्द कर दिया था।
इसके साथ ही बड़ी बात ये हुई कि सूरत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले बाकी अन्य उम्मीदवारों ने भी सोमवार, 22 अप्रैल को अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया, जिसकी वजह से बीजेपी के उम्मीदवार मुकेश दलाल को निर्विरोध रूप से विजेता घोषित कर दिया गया है। इससे पहले बीजेपी के 10 उम्मीदवारों ने अरुणाचल प्रदेश में निर्विरोध जीत दर्ज की थी।
लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग हो चुकी है और अगले छह चरणों में चुनाव होना बाकी है। इससे पहले बिना वोटिंग के ही सूरत सीट से भाजपा के उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर ली है। आखिर कैसे बिना चुनाव के जीत जाते हैं उम्मीदवार?
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