दिल्ली कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे अरविंदर सिंह लवली का फिर से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलते ही इस बात की चर्चा पर विराम लग गया कि नया अध्यक्ष कौन होगा? इस बात को लेकर लंबे समय से कयास बाजी का दौर जारी था। अब अनिल चौधरी दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हो गए हैं। लवली की ताजपोशी के साथ चर्चा इस बात की होने लगी है कि क्या वो इंडिया अलाएंस की राजनीति के दौर में AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं से तालमेल बैठा पाएंगे? यह सवाल सबसे ज्यादा अहम इसलिए है कि कुछ माह बाद लोकसभा चुनाव होना है।
इसलिए मिली दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी!
दरअसल, अरविंदर सिंह लवली कांग्रेस के युवा और कद्दावर नेता है। वह न केवल शिक्षा और परिवहन मंत्री रह चुके हैं, बल्कि वो इससे पहले भी दिल्ली कांग्रेस की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उनकी पकड़ न केवल पंजाबी मतदाताओं पर है, बल्कि पूर्वांचली वोटर्स में भी उनकी अच्छी पकड़ है। वह दिल्ली कांग्रेस नेताओं के पसंद और नापसंद को भी अच्छी तरह से जानते हैं।. अलायंस के दौर में वो दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष पद के मुफीद शख्स भी हैं। ऐसा इसलिए कि वह लोकसभा चुनाव 2019 में भी AAP के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पक्ष में रहे थे। इस मसले पर उनका कांग्रेस के कुछ नेताओं से पर्दे के पीछे मतभेद भी रहा था।
अरविंदर सिंह लवली की खासियत यह भी कि वो राजनीति में हार्डलाइन खींचकर चलने में विश्वास कम रखते हैं। वह पार्टी के हितों पर जोर तो देते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर किसी और से साथ तालमेल बनाने में भी पीछे नहीं रहते हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए संदीप दीक्षित, अजय माकन और देविंदर यादव का नाम भी सुर्खियों में रहा, लेकिन इनमें से दो ने नेता तो साफ तौर पर AAP के साथ गठबंधन का विरोध करते आये हैं। यही वजह है कि इंडिया अलाएंस में AAP के होने की वजह से पार्टी ने उन्हें ही दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला लिया है। जानकारी के मुताबिक वो AAP नेताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाने में ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं।
गौतम गंभीर और आतिशी के खिलाफ लड़ चुके हैं चुनाव
बता दें कि कांग्रेस ने गुरुवार को दिल्ली के नए अध्यक्ष का एलान कर दिया है। नेतृत्व ने अनिल चौधरी की जगह अब अरविंदर सिंह लवली को राजधानी में पार्टी को लीड करने की जिम्मेदारी सौंपी है। लवली साल 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी प्रत्याशी गौतम गंभीर और आतिशी (AAP) के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। दोनों चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लवली कॉलेज के दौर से ही दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हैं। 1990 में वह दिल्ली युवा कांग्रेस के महासचिव की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। 1992 से 1996 तक नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के महासचिव के रूप में कार्य किया। 2017 में, उन्होंने कुछ समय के लिए पार्टी से अपना नाता तोड़ लिया और अप्रैल 2017 में विरोधी पार्टी बीजेपी में शामिल हो गए, लेकिन वो बीजेपी नेताओं से तालमेल नहीं बैठा पाए। कुछ समय बाद कांग्रेस में वापस लौट आये।
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