केंद्र की मोदी सरकार ने अचानक 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। अब इसको लेकर देश में राजनीति भी देखने को मिलने लगी है। विपक्ष ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने के फैसले के बाद आरोप लगाया कि, कारोबारी अडाणी समूह के खिलाफ नये खुलासे होने और मुंबई में जारी विपक्षी गठबंधन I.N,D.I.A की बैठक के चलते समाचारों का प्रबंधन करने की कवायद के तहत विशेष सत्र की घोषणा की गई है।
मोदी सरकार किसी से सलाह-मशवरा तो करती नहीं है
आम आदमी पार्टी के नेता और मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सरकार द्वारा विशेष सत्र बुलाने पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि, केंद्र की मोदी सरकार किसी से सलाह-मशवरा तो करती नहीं है। किसी दल से कोई बातचीत नहीं करती है। क्या करना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि, पुराने सत्र में किसी को बोलने नहीं दिया गया। गलत तरीके से लोगों को सस्पेंड कर दिया गया। केंद्र सरकार गलत तरीके से लोकतंत्र का गला घोंट रही है।
अडाणी समूह मामले पर संसद में उठाएंगे
कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेता व महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि, इस विशेष सत्र के दौरान भी अडाणी समूह के मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच की मांग सदन के भीतर और बाहर जारी रहेगी। जयराम रमेश ने आगे सवाल किया है कि, जब मानसून सत्र 3 सप्ताह पहले ही समाप्त हुआ है तो ऐसे में संसद का 5 दिवसीय विशेष सत्र क्यों बुलाया गया है?
सरकार डर गई है - प्रियंका चतुर्वेदी
वहीं, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया कि, गणेश चतुर्थी के महत्वपूर्ण त्योहार के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि, यह हिन्दुओं की भावना के खिलाफ है। इसकी तिथियों के चुनाव को लेकर आश्चर्यचकित हूं। उद्धव ठाकरे गुट की नेत्री ने कहा कि, सरकार डर गई है।
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