नई दिल्ली. भारत द्वारा 6 मई से 9 मई तक बंगाल की खाड़ी के ऊपर हवाई क्षेत्र को प्रतिबंधित करने के लिए जारी किया गया नोटिस टू एयरमैन यानी NOTAM अब अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। यह प्रतिबंध ओडिशा तट स्थित अब्दुल कलाम द्वीप से शुरू होकर लगभग 3,560 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर तक फैला हुआ है। रक्षा विशेषज्ञ इसे किसी बड़े मिसाइल या अंतरिक्ष परीक्षण की तैयारी से जोड़कर देख रहे हैं। इस कदम ने न केवल पड़ोसी देशों बल्कि वैश्विक रक्षा एजेंसियों का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है।
‘अग्नि-6’ को लेकर सरकार की मंजूरी का इंतजार
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO के अध्यक्ष समीर वी कामत ने हाल ही में संकेत दिया था कि भारत की अगली पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-6’ पूरी तरह परीक्षण के लिए तैयार है और अब केवल केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी शेष है। यह बयान ऐसे समय आया जब भारत अपनी सामरिक ताकत को नई ऊंचाई देने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि यदि परीक्षण सफल रहता है तो भारत वैश्विक सामरिक शक्ति संतुलन में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने लगेगा।
MIRV तकनीक से लैस होगी नई पीढ़ी की मिसाइल
‘अग्नि-6’ की सबसे बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल की गई MIRV तकनीक मानी जा रही है। इस तकनीक के जरिए एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई अलग-अलग परमाणु वारहेड्स को विभिन्न लक्ष्यों तक सटीकता से पहुंचा सकती है। इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भ्रमित करना और उसे भेदना कहीं अधिक आसान हो जाता है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह तकनीक भारत की प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी और सामरिक युद्ध संतुलन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
हाइपरसोनिक तकनीक से मजबूत हुआ भारत का रक्षा कवच
भारत इससे पहले लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है। यह मिसाइल मैक-10 की गति से लक्ष्य को भेदने में सक्षम बताई गई थी। लगातार हो रहे इन उन्नत परीक्षणों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि भारत अब केवल पारंपरिक रक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भविष्य के युद्धों के अनुरूप आधुनिक और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के विकास पर तेजी से काम कर रहा है।
वैश्विक ताकतों की कतार में भारत की मजबूत दस्तक
यदि ‘अग्नि-6’ का परीक्षण सफल होता है तो भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में और मजबूती से शामिल हो जाएगा जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता मौजूद है। वर्तमान में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसी बड़ी शक्तियों के पास यह सामरिक क्षमता है। भारत की बढ़ती तकनीकी और सामरिक ताकत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञ इसे भारत की रक्षा नीति में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रभाव विस्तार की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।
राजनीतिक संकेतों ने भी बढ़ाई चर्चाए
भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने आधिकारिक सामाजिक मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर ‘अग्नि-6’ को लेकर बड़ा संकेत दिया। पार्टी ने इसे भारत के महाशक्ति बनने की दिशा में निर्णायक कदम बताया। पोस्ट में कहा गया कि 10,000 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता और MIRV तकनीक से लैस यह मिसाइल भारत की सुरक्षा को अभेद्य बनाएगी। राजनीतिक हलकों में भी इसे भारत की बढ़ती सैन्य आत्मनिर्भरता और रणनीतिक आक्रामकता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।