खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका से जुड़े चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस J. B. Pardiwala ने खुद को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया है। अब इस मामले की सुनवाई नई बेंच करेगी।
कंपनी विवाद, चेक बाउंस और IBC से जुड़ा मामला
यह मामला कंपनी के पैसों की कथित हेराफेरी, चेक बाउंस और दिवाला प्रक्रिया (IBC) से जुड़ा हुआ है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस केस में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई कंपनी दिवालिया घोषित हो जाती है, तो क्या उसके डायरेक्टरों पर चेक बाउंस का आपराधिक मुकदमा जारी रह सकता है?
महेंद्र गोयनका की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इसी संबंध में राहत की मांग की गई थी।
बीजेपी विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनी से जुड़ा विवाद
रायपुर निवासी महेंद्र गोयनका रियल एस्टेट और माइनिंग कारोबार से जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि वे बीजेपी विधायक Sanjay Pathak के परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजमेंट में अहम पद पर रहे हैं।
गोयनका पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी हस्ताक्षर और कथित जाली दस्तावेजों के जरिए कंपनी पर कब्जा जमाने की कोशिश की।
अब चीफ जस्टिस तय करेंगे नई बेंच
जस्टिस पारदीवाला के मामले से अलग होने के बाद अब यह फाइल भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पास जाएगी। नई बेंच का गठन होने के बाद ही आगे की सुनवाई शुरू होगी। फिलहाल मामले की सुनवाई टल गई है।
क्या होता है ‘रेक्यूजल’?
जब कोई जज किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लेता है, तो कानूनी भाषा में इसे ‘रेक्यूजल’ (Recusal) कहा जाता है। ऐसा आमतौर पर निष्पक्षता बनाए रखने और न्याय प्रक्रिया पर सवाल न उठें, इसके लिए किया जाता है।
संजय पाठक ने टिप्पणी से किया इनकार
इसी मामले में हाईकोर्ट जस्टिस को फोन करने के आरोपों को लेकर बीजेपी विधायक संजय पाठक मंगलवार को हाईकोर्ट पहुंचे थे। मीडिया ने उनसे बातचीत की कोशिश की, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है।