पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद केंद्र सरकार अब आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) को राज्य में दोबारा लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में अपने संबोधन के दौरान संकेत दिया कि नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही इस योजना को मंजूरी दी जा सकती है।
1.24 करोड़ परिवारों को होगा सीधा फायदा
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, योजना लागू होने के बाद पश्चिम बंगाल के करीब 1.24 करोड़ परिवारों को इसका लाभ मिल सकता है। इसके अलावा 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 16 लाख वरिष्ठ नागरिक भी विशेष स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आएंगे। योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने पर प्रति परिवार हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाता है।
आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी मिल सकता है लाभ
राज्य में कार्यरत करीब तीन लाख आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस योजना के दायरे में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
2019 में ममता सरकार ने वापस लिया था फैसला
आयुष्मान भारत योजना को शुरुआत में पश्चिम बंगाल में लागू किया गया था, लेकिन जनवरी 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार इससे अलग हो गई थी। राज्य सरकार का तर्क था कि योजना की लागत का बड़ा हिस्सा राज्य को उठाना पड़ेगा, जबकि इसका राजनीतिक श्रेय केंद्र सरकार को मिलेगा। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, यह योजना पश्चिम बंगाल में 23 सितंबर 2018 से 10 जनवरी 2019 तक ही लागू रही थी। उस समय राज्य के लिए लगभग 785 करोड़ रुपये का वार्षिक प्रावधान किया गया था।
स्वास्थ्य साथी बनाम आयुष्मान भारत
ममता सरकार ने बाद में राज्य की अपनी स्वास्थ्य साथी योजना लागू की, जिसमें भी प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया गया। हालांकि दोनों योजनाओं में पात्रता को लेकर बड़ा अंतर है।आयुष्मान भारत योजना में लाभ लेने के लिए व्यक्ति का सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 के आधार पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में होना जरूरी है। वहीं स्वास्थ्य साथी योजना में ऐसी कोई पात्रता शर्त नहीं रखी गई इसी वजह से राज्य की योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, स्वास्थ्य साथी योजना लगभग 2.42 करोड़ परिवारों को कवर करती है और यह राज्य के करीब 2,800 अस्पतालों से जुड़ी हुई है।
वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त फायदा
आयुष्मान भारत योजना में 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ का प्रावधान है, जो राज्य योजना में मौजूद नहीं है। हालांकि स्वास्थ्य साथी योजना में पति-पत्नी दोनों के माता-पिता को एकल परिवार के तहत शामिल करने की सुविधा दी गई है।
केंद्र और राज्य योजना को मिलाकर लागू करने पर विचार
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत को राज्य की मौजूदा स्वास्थ्य योजना के साथ जोड़कर लागू किया जा सकता है। ओडिशा, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों में इसी मॉडल पर काम हो रहा है, जहां केंद्र और राज्य की योजनाएं एकीकृत रूप में संचालित की जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम बंगाल में भी ऐसा मॉडल अपनाया जाता है तो राज्य के अधिक संख्या वाले लाभार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के अस्पताल नेटवर्क का फायदा मिल सकेगा। इससे राज्य के बाहर इलाज कराने वाले मरीजों को भी बड़ी सुविधा मिल सकती है।
स्वास्थ्य ढांचे को मिल सकती है नई मजबूती
राजनीतिक बदलाव के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में यह कदम पश्चिम बंगाल के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यदि योजना को राज्य की मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ संतुलित तरीके से लागू किया गया, तो लाखों परिवारों को बेहतर और व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध हो सकती है।