पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा में हुए जजों को बंधक बनाने के मामले ने सियासी और न्यायिक हलकों में हलचल मचा दी है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपने के लिए आधिकारिक चिट्ठी लिखी है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया है।
क्या है पूरा मामला
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में 7 न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेरकर करीब 9 घंटे तक बंधक बना लिया। ये अधिकारी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े काम के लिए वहां पहुंचे थे। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को देर रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उन्हें सुरक्षित निकालना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे “अक्षम्य अपराध” और “लोकतंत्र को चुनौती” करार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसका मकसद जजों को डराना और चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना था।
NIA जांच के आदेश
कोर्ट के निर्देश के बाद भारतीय निर्वाचन आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी के महानिदेशक को पत्र लिखकर जांच शुरू करने को कहा है। साथ ही, जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन पर उठे सवाल
कोर्ट ने राज्य प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। मालदा के डीएम, एसपी, डीजीपी और मुख्य सचिव के रवैये को “निंदनीय” बताया गया है। अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश
- घटना की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए
- जजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
- चुनावी ड्यूटी वाले इलाकों में केंद्रीय बल तैनात हों
- भीड़ नियंत्रण के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं
- संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया
ममता बनर्जी का बयान
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य में लगातार हो रहे ट्रांसफर के कारण प्रशासन पर उनका नियंत्रण कम हो गया है। उन्होंने इसे साजिश करार देते हुए आरोप लगाया कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश हो रही है।
अगली सुनवाई कब
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को 6 अप्रैल को वर्चुअली पेश होने का आदेश दिया है। इस मामले की सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।