भोपाल। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली भोपाल-आगरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना से दोनों राज्यों के बीच यातायात, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
3 साल में पूरा करने का लक्ष्य
प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे को आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों के साथ विकसित किया जाना है। परियोजना से जुड़े कामों में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृति और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रही हैं। निर्माण पूरा होने के बाद भोपाल और आगरा के बीच यात्रा का समय काफी कम होने का दावा किया गया है।
भोपाल से आगरा का सफर होगा आसान
प्रस्तावित फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बताई गई है। मौजूदा मार्ग से भोपाल से आगरा पहुंचने में करीब 12 से 13 घंटे लग सकते हैं, जबकि एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह समय घटकर लगभग 7 घंटे रह सकता है।
विदिशा-सागर से होकर जुड़ेगा यूपी
प्रस्तावित रूट मध्यप्रदेश के विदिशा और सागर क्षेत्रों से होकर उत्तर प्रदेश की ओर जाएगा। इसके आगे महोबा और झांसी क्षेत्र से कनेक्टिविटी विकसित होने की बात कही गई है। इससे बुंदेलखंड के कई इलाकों को बड़े बाजारों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद है।
उद्योग और व्यापार को मिलेगा फायदा
एक्सप्रेस-वे को सिर्फ यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसके आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से कृषि उत्पादों और अन्य सामान की ढुलाई आसान होने के साथ परिवहन लागत कम होने की उम्मीद है।
सफर के साथ मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
कॉरिडोर पर यात्रियों की सुविधा के लिए विश्राम स्थल, ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन और आपातकालीन चिकित्सा केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है। एक्सप्रेस-वे पर आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया जाएगा, जिससे यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके।
बुंदेलखंड के लिए भी अहम परियोजना
भोपाल-आगरा कॉरिडोर के तैयार होने से मध्यप्रदेश के कई हिस्सों का उत्तर प्रदेश और आगे एनसीआर से संपर्क मजबूत हो सकता है। इससे स्थानीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को नई संभावनाएं मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की अंतिम लंबाई, विस्तृत एलाइनमेंट, भूमि अधिग्रहण और निर्माण की वास्तविक समयसीमा से जुड़ी आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।