रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अपने 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार को विशेष समारोह मना रहा है। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को बधाई दी और उनकी प्रतिबद्धता, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय कर्तव्य की भावना की प्रशंसा की।
डीआरडीओ की स्थापना और उद्देश्य
डीआरडीओ की स्थापना 1958 में हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत को सशक्त बनाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रशासन में टेक्निकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और इंडियन ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज के डायरेक्टरेट को डिफेंस साइंस ऑर्गनाइजेशन के साथ विलय करके डीआरडीओ का गठन किया गया। साल 1979 में, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट सर्विस (DRDS) का गठन किया गया, जो सीधे रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करती है।
रक्षा मंत्री के संदेश में वैज्ञानिकों की सराहना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा: “डीआरडीओ दिवस पर मैं सभी वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और उनके परिवारों को बधाई देता हूं। उनकी अटूट प्रतिबद्धता, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय कर्तव्य की भावना भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है।” उन्होंने आगे कहा कि स्वदेशी और भविष्य की तकनीक विकसित करके, डीआरडीओ हमारी रणनीतिक स्वायत्तता और सशस्त्र बलों के आत्मविश्वास को मजबूत कर रहा है।
डीआरडीओ का योगदान और संरचना
डीआरडीओ के पास 52 प्रयोगशालाओं का विशाल नेटवर्क है, जो एयरोनॉटिक्स, हथियार, इलेक्ट्रॉनिक्स, भूमि युद्ध इंजीनियरिंग, जीवन विज्ञान, सामग्री, मिसाइल और नौसेना प्रणालियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय है। आज यह भारत का सबसे बड़ा और विविध रक्षा अनुसंधान संगठन है, जिसमें लगभग 5 हजार वैज्ञानिक और 25 हजार तकनीकी एवं सहायक कर्मचारी कार्यरत हैं। ये सभी मिलकर देश की रक्षा क्षमताओं और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहे हैं।
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