आर्मी हॉस्पिटल (R&R), दिल्ली कैंट के नेत्र रोग विभाग ने घोषणा की है कि उन्होंने देश में पहली बार 3D फ्लेक्स एक्वियस एंजियोग्राफी के साथ iStent तकनीक का सफल उपयोग किया है। यह उपलब्धि भारत में ग्लूकोमा उपचार को एक नई वैज्ञानिक ऊँचाई पर ले जाती है। इस विधि से डॉक्टर आंख के अंदर मौजूद तरल पदार्थ के बहाव को वास्तविक समय में 3D इमेजिंग के माध्यम से देख सकते हैं, जिससे उपचार और भी सटीक हो जाता है।
3-D तकनीक से बढ़ी सर्जरी की सटीकता
नई तकनीक में आधुनिक 3D माइक्रोस्कोप और एडवांस इमेजिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता है। इससे आंख में बनने वाले तरल (एक्वियस ह्यूमर) के प्रवाह का साफ़ और विस्तृत दृश्य मिलता है। इस वैज्ञानिक समझ के आधार पर iStent नामक सूक्ष्म उपकरण लगाया जाता है, जो आंख के अंदर दबाव कम करने में मदद करता है। इससे ऑप्टिक नर्व को होने वाले नुकसान का जोखिम घटता है और दृष्टि को सुरक्षित रखने की संभावना बढ़ती है।
कम चीरा, कम दर्द — रोगी के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प
इस तकनीक का एक बड़ा लाभ यह है कि इसमें माइक्रो-इनवेसिव सर्जरी की जाती है। पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इसमें कम चीरा लगता है, खून कम बहता है और संक्रमण की संभावना भी घटती है। मरीज कम दर्द का अनुभव करते हैं और रिकवरी का समय भी काफी कम हो जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह उपचार हाई-प्रिसीजन और रोगी-केंद्रित दोनों है।
ग्लूकोमा: ‘साइलेंट विजन लॉस’ का वैज्ञानिक विश्लेषण
ग्लूकोमा वह स्थिति है जिसमें आंख का आंतरिक दबाव बढ़ने से ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुँचता है। शुरुआती चरण में लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए इसे अक्सर ‘साइलेंट विजन लॉस’ कहा जाता है। अनुपचारित रहने पर यह स्थायी अंधत्व का कारण भी बन सकता है। 3D इमेजिंग आधारित उपचार से बीमारी की स्टेजिंग, मॉनिटरिंग और सर्जिकल हस्तक्षेप — सभी अधिक वैज्ञानिक और सटीक हो जाते हैं।
नेत्र चिकित्सा में भविष्य की दिशा
डॉक्टरों का मानना है कि यह तकनीक भारत में ग्लूकोमा के इलाज के मानकों को बदल सकती है। इससे न केवल सैनिकों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा, बल्कि भविष्य में नागरिक स्वास्थ्य संस्थानों में भी इसका उपयोग बढ़ सकता है। यह उपलब्धि भारत को एडवांस नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर और अधिक मज़बूत स्थिति दिलाती है।
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