दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। केरल में प्रवेश के बाद यह कर्नाटक, तमिलनाडु और गोवा तक पहुंच चुका है तथा आगे महाराष्ट्र की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में मानसून की गति और तेज हो सकती है, जिससे दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के अनेक राज्यों में व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिलेंगी। इस प्रगति को कृषि, जल संसाधन और तापमान नियंत्रण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
17 राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों के दौरान दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। विशेष रूप से असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा तथा पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी रह सकता है। दक्षिण भारत में भी कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तटीय क्षेत्रों में वर्षा गतिविधियों में तेजी आने के संकेत हैं। इससे नदियों के जलस्तर, स्थानीय यातायात और जनजीवन पर प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
अगले दस दिनों में पूर्वी भारत तक पहुंचेगा मानसून
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मानसून आगामी दस दिनों के भीतर पूर्वी भारत के बड़े हिस्से को कवर कर सकता है। बिहार, झारखंड और ओडिशा के अनेक क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियों के प्रवेश की संभावना जताई गई है। कृषि क्षेत्र के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई का समय निकट है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मानसून पहुंचने से किसानों को राहत मिलेगी और जलाशयों में भी पानी की उपलब्धता बढ़ेगी।
दिल्ली-एनसीआर को अभी करना होगा इंतजार
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को मानसून के लिए अभी कुछ और दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मानसून 25 से 30 जून के बीच दस्तक दे सकता है। हालांकि इससे पहले मौसम में कुछ अस्थायी बदलाव देखने को मिलेंगे। अगले दो दिनों तक तेज हवाओं, गरज-चमक और स्थानीय मौसमीय गतिविधियों की संभावना जताई गई है। हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
पंजाब और हरियाणा में भी बाद में पहुंचेगा मानसून
दिल्ली के बाद मानसून की अगली महत्वपूर्ण प्रगति पंजाब और हरियाणा की ओर होगी। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जून के अंतिम सप्ताह में उत्तर-पश्चिम भारत के इन क्षेत्रों में भी मानसूनी बादल सक्रिय हो सकते हैं। तब तक यहां के लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बीच-बीच में स्थानीय स्तर पर तेज हवाएं और हल्की बारिश कुछ राहत जरूर दे सकती है।
उत्तर और मध्य भारत में लू का खतरा बरकरार
मानसून की प्रगति के बावजूद उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में गर्मी का प्रभाव अभी कम नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश, ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। वाराणसी, कानपुर, प्रयागराज और बांदा जैसे शहरों में तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने 9 जून से 11 जून के बीच कुछ क्षेत्रों में लू चलने की आशंका व्यक्त की है, जिसके कारण दिन के समय बाहर निकलने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
तटीय क्षेत्रों में बढ़ेगी उमस और गर्म रातें
जहां उत्तर भारत में लू चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं तटीय क्षेत्रों में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। तटीय आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी सहित कुछ क्षेत्रों में रात के समय भी तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्री नमी और उच्च तापमान के कारण रात में भी राहत नहीं मिल पाएगी, जिससे लोगों को असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
मौसम के बदलते स्वरूप पर नजर रखना जरूरी
देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम की अलग-अलग स्थितियां इस बात का संकेत हैं कि आगामी सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। कहीं मूसलाधार बारिश की चुनौती होगी तो कहीं भीषण गर्मी और लू का असर बना रहेगा। ऐसे में नागरिकों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की यह प्रगति आने वाले दिनों में देश के मौसमीय परिदृश्य को तेजी से बदल सकती है।