नई दिल्ली। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की ताजा बढ़ोतरी के बाद देश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। एक तरफ केंद्र सरकार का दावा है कि भारत में अब भी दुनिया और पड़ोसी देशों के मुकाबले सबसे सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब सरकारी तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं तो आम जनता पर लगातार महंगाई का बोझ क्यों डाला जा रहा है। नई कीमत लागू होने के बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब 942 रुपये में मिलेगा। पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बढ़ोतरी है और इस दौरान सिलेंडर कुल 89 रुपये महंगा हो चुका है। सरकार का दावा- वास्तविक कीमत 1600 रुपये से ज्यादा, लेकिन उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बावजूद सरकार पूरी लागत उपभोक्ताओं पर नहीं डाल रही है। मंत्रालय का कहना है कि यदि घरेलू गैस सिलेंडर को पूरी तरह बाजार मूल्य पर बेचा जाए तो इसकी कीमत 1600 रुपये से अधिक हो सकती है। इसके बावजूद आम उपभोक्ता को 942 रुपये में और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रभावी रूप से 642 रुपये में सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।
आखिर गैस इतनी महंगी क्यों हो रही है?
सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और कीमतें सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस के आधार पर तय होती हैं।
फरवरी 2026 में एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय भाव लगभग 543 डॉलर प्रति टन था।
जून 2026 तक यह बढ़कर करीब 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया।
यानी चार महीनों में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
क्या पड़ोसी देशों से सच में सस्ती है भारत की रसोई गैस?
केंद्र सरकार का दावा है कि भारत में घरेलू गैस अब भी कई देशों की तुलना में सस्ती है।
सरकार के मुताबिक उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाला सिलेंडर-
| देश | सिलेंडर की कीमत |
|---|---|
| भारत (उज्ज्वला) | ₹642 |
| भारत (सामान्य उपभोक्ता) | ₹942 |
| पाकिस्तान | ₹1,046 |
| नेपाल | ₹1,207 |
| बांग्लादेश | ₹1,225 |
| श्रीलंका | ₹1,241 |
| अमेरिका | ₹1,755 |
| ऑस्ट्रेलिया | ₹1,765 |
| कनाडा | ₹2,411 |
जैसे पड़ोसी देशों के मुकाबले सस्ता है।
वहीं अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में घरेलू गैस की कीमत भारत से कई गुना अधिक बताई गई है।
घरेलू गैस पर 60 हजार करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का दावा
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार घरेलू एलपीजी पर तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी लगातार बढ़ रही है।
पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
इससे पहले अंडर-रिकवरी 41,338 करोड़ रुपये थी।
तेल कंपनियों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 30 हजार करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है।
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश में गैस की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी गई और अमेरिका, कनाडा तथा अल्जीरिया जैसे देशों से भी आयात बढ़ाया गया।
कांग्रेस का पलटवार- रिकॉर्ड मुनाफा है तो कीमतें क्यों बढ़ रहीं?
एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं तो फिर बार-बार गैस की कीमतें बढ़ाने की क्या जरूरत है? तिवारी के अनुसार- वित्त वर्ष 2025-26 में तीनों सरकारी तेल कंपनियों ने मिलकर 77,280 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। यह पिछले साल की तुलना में करीब 130 प्रतिशत अधिक है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार धीरे-धीरे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ाकर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।
महंगाई पर नई बहस, राहत और बोझ के बीच फंसा आम उपभोक्ता
एक तरफ सरकार अंतरराष्ट्रीय संकट और बढ़ती ऊर्जा लागत का हवाला देकर कीमतों को जायज ठहरा रही है, वहीं विपक्ष इसे आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ बता रहा है। ऐसे में घरेलू गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि आम उपभोक्ता के लिए रसोई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।