भोपाल। मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए इंतजार की घड़ी खत्म होने वाली है। 8 जून से स्कूल शिक्षा विभाग की नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने जा रही है, लेकिन इस बार सिर्फ आवेदन भरना ही काफी नहीं होगा। पहले किसका तबादला होगा, किसे पसंदीदा जगह मिलेगी और किन कर्मचारियों को स्थानांतरण से बाहर रखा जाएगा, इसे लेकर विभाग ने कई अहम नियम तय किए हैं। नई व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और समयबद्ध होगी, जबकि विभाग का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और शिक्षकों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
पहले प्रशासनिक, उसके बाद होंगे स्वैच्छिक तबादले
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सबसे पहले प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे। इसके बाद रिक्त पदों के आधार पर स्वैच्छिक तबादलों की प्रक्रिया शुरू होगी। अंतर्जिला स्थानांतरण के लिए 8 से 15 जून तक आवेदन किए जा सकेंगे, जबकि जिला कैडर, संभाग और राज्य स्तर के स्थानांतरण के लिए 8 से 17 जून तक ऑनलाइन आवेदन का मौका मिलेगा।
18 जून को सामने आएगी खाली पदों की सूची
स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए रिक्त पदों की जानकारी 18 जून को पोर्टल पर जारी की जाएगी।
महत्वपूर्ण तारीखें
सत्र के बीच भी हो सकता है ट्रांसफर
नई नीति के मुताबिक यदि किसी स्कूल में शिक्षकों की संख्या जरूरत से ज्यादा है और दूसरे स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, तो अतिशेष (सरप्लस) शिक्षकों को शैक्षणिक सत्र के बीच भी कभी भी स्थानांतरित किया जा सकेगा। इसके लिए काउंसलिंग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यदि कोई शिक्षक काउंसलिंग में शामिल नहीं होता है तो उसका तबादला प्रशासनिक आधार पर किया जा सकता है।
कौन माना जाएगा सरप्लस शिक्षक?
नई गाइडलाइन के अनुसार जिस संस्था में शिक्षक आवश्यकता से अधिक होंगे, वहां सामान्य तौर पर सबसे लंबे समय से कार्यरत शिक्षक को अतिशेष माना जाएगा। हालांकि यदि पिछले दो वर्षों में स्थानांतरित होकर आए शिक्षकों के कारण यह स्थिति बनी है, तो दो साल के भीतर पदस्थ हुए शिक्षक सरप्लस की श्रेणी में रखे जाएंगे।
इन कर्मचारियों को मिलेगी सबसे ज्यादा प्राथमिकता
स्वैच्छिक स्थानांतरण में प्राथमिकता क्रम भी तय कर दिया गया है। सबसे पहले मौका मिलेगा-
10वीं बोर्ड में 100 फीसदी परिणाम देने वाले स्कूलों के प्राचार्य और शैक्षणिक स्टाफ को।
सरप्लस महिला शिक्षकों को।
सरप्लस पुरुष शिक्षकों को।
गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों और उनके परिवार को।
पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थापना चाहने वाले कर्मचारियों को।
दिव्यांग शिक्षकों को।
विधवा, परित्यक्ता महिला और विधुर कर्मचारियों को।
राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को।
वरिष्ठता के आधार पर अन्य कर्मचारियों को।
किनका नहीं होगा तबादला?
जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष है, उनका प्रशासनिक स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा जिन कर्मचारियों का गृह जिला और वर्तमान पदस्थापना जिला एक ही है, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में वहीं रखा जाएगा।
महिला कर्मचारियों और गंभीर बीमारी वाले मामलों में राहत
अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं के साथ-साथ गंभीर बीमारी से जूझ रहे शिक्षक या उनके पति-पत्नी के मामलों में गृह जिले अथवा सुविधाजनक स्थान पर पदस्थापना पर विशेष विचार किया जाएगा। पति या पत्नी की मृत्यु होने की स्थिति में भी दो वर्षों के भीतर एक बार प्रथम वरीयता का लाभ दिया जाएगा।
वेतन को लेकर भी सख्त हुआ विभाग
स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद कर्मचारी का वेतन पुराने संस्थान से नहीं निकलेगा। कार्यमुक्ति के बाद अंतिम वेतन प्रमाण पत्र और सेवा अभिलेख नए कार्यालय को भेजना अनिवार्य होगा। आदेश का पालन नहीं करने या बिना अनुमति अवकाश पर जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता पर उठे सवाल
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने स्वैच्छिक स्थानांतरण में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह शर्त वर्षों से तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के साथ अन्याय है और सरकार को इस प्रावधान पर पुनर्विचार करना चाहिए।
क्या बदलेगी नई व्यवस्था?
स्कूल शिक्षा विभाग का दावा है कि नई ट्रांसफर पॉलिसी से शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित होगा और प्रदेश के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक दखल कम होगा।