नई दिल्ली. देश में जारी भीषण गर्मी का असर अब बिजली खपत पर साफ नजर आ रहा है। ऊर्जा मंत्रालय भारत के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताहांत भारत में बिजली की मांग बढ़कर रिकॉर्ड 256 गीगावाट तक पहुंच गई। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है, जो दर्शाता है कि तापमान में वृद्धि के साथ ऊर्जा जरूरतें कितनी तेजी से बढ़ रही हैं।
कूलिंग उपकरणों की बढ़ती मांग बनी मुख्य वजह
गर्मी की तीव्रता के चलते देशभर में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ गया है। इसी कारण दोपहर के समय बिजली की मांग अपने चरम पर पहुंची। शनिवार को दोपहर 3 बजकर 38 मिनट पर बिजली की अधिकतम मांग 256.1 गीगावाट दर्ज की गई, जो पिछले सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ गई।
सौर ऊर्जा ने संभाली बड़ी जिम्मेदारी
इस बढ़ती मांग को पूरा करने में सौर ऊर्जा का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उसी समय सौर ऊर्जा से लगभग 57 गीगावाट बिजली का उत्पादन हुआ, जो कुल उत्पादन का करीब 22 प्रतिशत था। दिन के समय यह योगदान और भी अधिक रहा, जब दोपहर 12.30 बजे के आसपास सौर उत्पादन बढ़कर लगभग 81 गीगावाट तक पहुंच गया।
रिकॉर्ड टूटने का सिलसिला जारी, और बढ़ेगी मांग
उच्च खपत के कारण शनिवार की मांग ने 24 अप्रैल को दर्ज 252.1 गीगावाट के पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर लिया। ऊर्जा मंत्रालय का अनुमान है कि इस वर्ष देश में बिजली की चरम मांग 271 गीगावाट तक पहुंच सकती है। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में ऊर्जा प्रबंधन और भी चुनौतीपूर्ण होने वाला है।
नवीकरणीय ऊर्जा का बढ़ता महत्व
नरेंद्र मोदी ने अपने संवाद कार्यक्रम में वैश्विक अस्थिरता के बीच नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सौर और पवन ऊर्जा को भारत के भविष्य की कुंजी बताया और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की अपील की। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रगति को भी देश की बड़ी उपलब्धि बताया गया।
भविष्य की जरूरतों के लिए नई रणनीति
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, रूफटॉप सोलर सिस्टम और अन्य नवीकरणीय स्रोतों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि शाम के समय होने वाली चरम मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सके।
ऊर्जा संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती
हालांकि कोयला आधारित संयंत्र अभी भी बेसलोड आपूर्ति का मुख्य आधार बने हुए हैं, लेकिन गैर-जीवाश्म स्रोतों का योगदान लगातार बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में ऊर्जा के इस संतुलन को बनाए रखना और बढ़ती मांग को पूरा करना सरकार और ऊर्जा क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।