नई दिल्ली. किसान सर्दियों की फसल सीजन की तैयारी कर रहे हैं लेकिन भारत अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर रहा है। मिट्टी में नमी की कमी और मजबूत होते अल नीनो से बुवाई में देरी कम क्षेत्रफल और कमजोर पैदावार का खतरा बढ़ गया है। जल उपलब्धता और खाद्य आपूर्ति पर भी दबाव पड़ने की आशंका है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 12.6 प्रतिशत सामान्य से कम बारिश के साथ समाप्त हुआ जो 2001 के बाद चौथा सबसे कम मानसून रहा। पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में 25 प्रतिशत तथा दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 24 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। कई कृषि क्षेत्रों में नमी की कमी के साथ रबी सीजन नजदीक आ गया है।
मिट्टी की नमी में भारी कमी
2026 का कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून दीर्घकालिक औसत से 13 प्रतिशत और पिछले साल से 21 प्रतिशत कम रहा। इससे देश के बड़े इलाकों में मिट्टी की नमी अपर्याप्त रह गई है। मजबूत होते अल नीनो के कारण अक्टूबर में सूखा पड़ने की संभावना के साथ रबी बुवाई और समग्र फसल संभावनाओं के लिए गंभीर समस्या पैदा हो गई है। मानसून की कमी ने कई क्षेत्रों में नमी का स्तर बहुत नीचे ला दिया है। किसानों को अतिरिक्त सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ सकता है। जल संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
अल नीनो की बढ़ती ताकत
अल नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के आवधिक गर्म होने की घटना है जो वैश्विक मौसम पैटर्न को बाधित कर सकती है। कई वैश्विक मौसम मॉडल तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के नवीनतम पूर्वानुमान में संकेत दिया गया है कि यह घटना मजबूत हो रही है और इस वर्ष के अंत नवंबर में बहुत मजबूत होने की उम्मीद है। नवंबर में ही भारत में अधिकांश रबी फसलों की बुवाई होती है। मजबूत एल नीनो से सर्दियों में बारिश की संभावना और कम हो सकती है। इससे बुवाई का समय प्रभावित होने का खतरा है। फसल चक्र पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
रबी फसलों पर संभावित प्रभाव
कम मिट्टी नमी और मजबूत अल नीनो के संयोजन से रबी फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है। गेहूं चना सरसों जैसी प्रमुख फसलों का क्षेत्रफल घट सकता है। पैदावार भी प्रभावित होने की आशंका है। जल उपलब्धता पर दबाव बढ़ेगा क्योंकि सिंचाई की मांग बढ़ जाएगी। खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वैकल्पिक उपाय और जल प्रबंधन से कुछ राहत मिल सकती है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे नमी संरक्षण तकनीकों का उपयोग करें। सरकार और कृषि विभाग स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
आगे की चुनौतियां और तैयारी
रबी सीजन की सफलता के लिए मिट्टी की नमी और मौसम की अनुकूलता बहुत जरूरी है। वर्तमान संकेतों से अनिश्चितता बढ़ी है। आईएमडी और अन्य एजेंसियां नियमित अपडेट जारी कर रही हैं। किसानों को समय पर बुवाई और जल प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है। कमजोर मानसून के प्रभाव को कम करने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और सूखा प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग सहायक हो सकता है। कुल मिलाकर सर्दियों की फसलों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां बन रही हैं। समय रहते सही रणनीति अपनाने से नुकसान को सीमित किया जा सकता है।