मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का दिन 'अमंगल' साबित हुआ। सप्ताह के शुरुआती दो सत्रों में तेजी दिखाने के बाद, तीसरे दिन दलाल स्ट्रीट पर 'बुल' पस्त नजर आए और बाजार लाल निशान के गहरे गड्ढे में जा गिरा। वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने की घोषणा के बावजूद भारतीय बाजार खुद को संभालने में नाकाम रहा।
बाजार का हाल: सेंसेक्स और निफ्टी में कोहराम
बुधवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही बेदम नजर आए:
सेंसेक्स: पिछले बंद के मुकाबले करीब 800 अंक (1.01%) गिरकर 78,469 के स्तर पर आ गया।
निफ्टी 50: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स 200 अंकों (0.88%) से ज्यादा की गिरावट के साथ 24,359 पर बंद हुआ।
IT सेक्टर में भारी गिरावट, स्मॉल कैप ने संभाला मोर्चा
बाजार में सबसे ज्यादा मार IT सेक्टर पर पड़ी, जहाँ साढ़े तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। प्राइवेट बैंक, फाइनेंशियल सर्विस और कैपिटल मार्केट इंडेक्स भी दबाव में रहे। हालांकि, इस गिरावट के बीच स्मॉल कैप शेयरों ने राहत दी। निफ्टी स्मॉल कैप 100 में 0.43% और स्मॉल कैप 250 में 0.36% की बढ़त देखी गई।
गिरावट के पीछे के मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बड़ी गिरावट के पीछे दो मुख्य वजहें रहीं:
1. विदेशी निवेश की निकासी (FII Outflow): सप्ताह की शुरुआत से ही विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
2. रुपये में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 0.39% टूटकर 93.49 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
वैश्विक स्थिति और क्रूड ऑयल
दिलचस्प बात यह है कि जापान, कोरिया और हांगकांग के बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। ट्रंप के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट आई है और क्रूड ऑयल 89.37 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इसके बावजूद, घरेलू कारकों और विदेशी फंडों की बेरुखी ने भारतीय निवेशकों के करोड़ों रुपये डुबो दिए।