भारत के विदेश मंत्री ने शनिवार को कहा कि भारत समुद्री कानून से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता है।उन्होंने बताया कि ईरान का युद्धपोत ‘आईआरआईएस लावान’ कोच्चि बंदरगाह पर तकनीकी समस्या के कारण मानवीय आधार पर आने की अनुमति दी गई थी।
तकनीकी खराबी के कारण मांगी गई थी अनुमति
विदेश मंत्री ने बताया कि ईरानी पक्ष की ओर से भारत को संदेश भेजा गया था कि उनका एक जहाज तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहा है और वह भारतीय बंदरगाह में प्रवेश करना चाहता है। उस समय जहाज भारतीय समुद्री सीमा के सबसे नजदीक था। इस अनुरोध के बाद भारत ने स्थिति की समीक्षा की और मानवीय आधार पर जहाज को प्रवेश की अनुमति दे दी। जहाज को अनुमति मिलने के बाद वह कुछ दिनों में केरल के कोच्चि बंदरगाह पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम में आया था जहाज
ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस लावान’ अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए क्षेत्र में मौजूद था। यह जहाज भारत में आयोजित International Fleet Review और MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था। यह कार्यक्रम 15 फरवरी से 25 फरवरी तक आयोजित किया गया था। जहाज के कोच्चि पहुंचने के बाद उसके 183 चालक दल के सदस्य फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं।
युवा कैडेट भी थे जहाज पर
विदेश मंत्री ने बताया कि जहाज पर मौजूद कई सदस्य युवा नौसैनिक कैडेट थे। जहाज के कोच्चि पहुंचने के बाद चालक दल के सदस्यों को जहाज से उतरने की अनुमति दी गई और उन्हें पास के नौसैनिक परिसर में ठहराया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जब जहाज अपने अभियान पर निकला था तब क्षेत्र की परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन बाद में हालात बदल गए।
डूबे ईरानी युद्धपोत पर भी चर्चा
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में ईरान का युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ हिंद महासागर क्षेत्र में डूबने की खबरों के कारण चर्चा में है। इस घटना के बाद भारत द्वारा ईरानी जहाज को बंदरगाह में अनुमति देने के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान गया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि उसका निर्णय पूरी तरह मानवीय आधार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप लिया गया था।
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