जैसलमेर के 'चादर महोत्सव' में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि, विश्व में चल रही जंग और झगड़े तभी खत्म होंगे, जब लोग एक-दूसरे के बीच की एकता को समझना शुरू करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने साफ शब्दों में आगे कहा कि, ईश्वर के रूप भले ही अलग-अलग हों, लेकिन सच तो एक ही है।
दुनिया आज भी संघर्षों से जूझ रही है
मोहन भागवत के मुताबिक, जब तक हम इस एकता को नजरअंदाज करेंगे, तब तक दुनिया से आपसी टकराव खत्म नहीं हो सकता। इस दौरान उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि, पहले विश्व युद्ध के बाद लीग ऑफ नेशंस बना और दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) का गठन हुआ। इन सबका मकसद जंग रोकना था, लेकिन दुनिया आज भी संघर्षों से जूझ रही है।
मानवता अक्सर एकता के सच को भूल जाती है
RSS प्रमुख ने अपने इस संबोधन में आगे कहा कि, मानवता अक्सर एकता के सच को भूल जाती है, जिसकी वजह से ये बड़ी संस्थाएं भी पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही हैं। मोहन भागवत के अनुसार, लोग बाहर से अलग दिख सकते हैं, लेकिन अंदर से सब एक ही हैं। वहीं आगे भारतीय चिंतन पर जोर देते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विवादों को केवल बहस या तर्क-वितर्क से नहीं सुलझाया जा सकता। इसके लिए समाज में आपसी भाईचारा और सद्भाव पैदा करना होगा।
समाज को स्वार्थ और बंटवारे से ऊपर उठना चाहिए
मोहन भागवत ने अपील की है कि, समाज को धीरे-धीरे स्वार्थ और बंटवारे से ऊपर उठना चाहिए। RSS प्रमुख के मुताबिक, भारत के पास दुनिया की समस्याओं का असली समाधान उसकी पुरानी परंपराओं में ही छिपा है। भागवत ने आगे कहा कि, अगर हम बिना किसी भेदभाव के एकजुट हों, तो भारत न केवल समृद्ध बनेगा बल्कि 'विश्वगुरु' के रूप में एक बेहतर दुनिया का निर्माण भी करेगा।
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