नई दिल्ली- छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का जाना भारतीय कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रधानमंत्री ने उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सोशल मीडिया पर दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि उनकी कला और सांस्कृतिक योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश का समापन 'ओम शांति' लिखकर किया।
आज पैतृक गांव गनियारी में होगा अंतिम संस्कार
70 वर्षीय तीजन बाई का शनिवार देर रात रायपुर एम्स में निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से बीमार थीं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। उनका अंतिम संस्कार आज उनके पैतृक गांव गनियारी में किया जाएगा। उनके निधन से छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर है।
पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान
तीजन बाई ने अपनी बुलंद आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी गायन को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत करने की उनकी कला ने उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में शामिल कर दिया। उन्होंने अनेक देशों में प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
नाना से मिली प्रेरणा, बचपन से शुरू हुआ सफर
तीजन बाई का जन्म पारधी जनजाति के परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम चुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था। बचपन में वे अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कथाएं सुनती थीं। इन्हीं कथाओं ने उनके भीतर पंडवानी के प्रति गहरी रुचि जगाई। बाद में प्रसिद्ध लोकगायक उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें विधिवत प्रशिक्षण दिया। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच पर पंडवानी की प्रस्तुति दी।
रूढ़ियों को तोड़ने वाली पहली महिला बनीं
उस समय महिलाओं को केवल बैठकर पंडवानी गाने की अनुमति थी, जिसे वेदमती शैली कहा जाता था। पुरुष कलाकार खड़े होकर कापालिक शैली में प्रस्तुति देते थे। तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए पहली महिला कलाकार के रूप में कापालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी प्रस्तुत की। यही शैली आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई।
शिक्षा कम, सम्मान अनगिनत
तीजन बाई औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकीं और बाद में साक्षरता अभियान के जरिए केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई कर पाईं। लेकिन अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर उन्होंने देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किए। उन्हें चार बार डी.लिट. की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया गया।