केंद्र सरकार ने चार प्रमुख श्रम संहिताओं के लिए मसौदा नियम जारी कर दिए हैं और उद्योग तथा आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इनके लागू होने के बाद ही नए श्रम कानून पूरी तरह प्रभावी होंगे। ये चार संहिताएँ हैं—वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों की संहिता 2020। चूंकि श्रम विषय संविधान की समवर्ती सूची में आते हैं, इसलिए राज्यों को भी अपने स्तर पर नियम बनाने होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि 1 अप्रैल 2026 से ये सभी प्रावधान पूरे देश में लागू हो जाएँ।
श्रमिकों के अधिकारों को मिलेगी नई मजबूती
नए मसौदा नियमों में कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ अनिवार्य रूप से लागू करने का प्रस्ताव है। सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देना अब अनिवार्य होगा। 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराई जाएगी। समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत और अधिक सख्ती से लागू होगा। साथ ही महिलाओं को विभिन्न शिफ्टों में काम करने के लिए सुरक्षित और समान अवसर मिलेंगे। उद्देश्य है कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक और विश्वसनीय कार्य माहौल तैयार करना।
सामाजिक सुरक्षा कवर होगा और व्यापक
केंद्रीय श्रम मंत्री के अनुसार सरकार मार्च 2026 तक 100 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का लक्ष्य रखती है। वर्तमान में लगभग 94 करोड़ श्रमिक इससे लाभान्वित हो रहे हैं। 2015 में यह कवरेज मात्र 19% था जो अब 64% से अधिक हो चुका है। यह दर्शाता है कि सरकार असंगठित क्षेत्र सहित सभी श्रमिकों तक सुरक्षा जाल पहुँचाने के प्रति गंभीर है।
वेतन कटौती पर तय होगी सीमारेखा
नए कानून के अनुसार किसी कर्मचारी के वेतन से 50% से अधिक कटौती नहीं की जा सकेगी। बेसिक सैलरी, डीए और अन्य अनिवार्य भत्ते कुल CTC का अधिकतम 50% होंगे। शेष 50% में एचआरए, बोनस, कमीशन, पीएफ आदि जोड़े जाएंगे। यदि भत्तों की राशि 50% से अधिक हो जाती है तो अतिरिक्त हिस्सा सीधे सैलरी में शामिल कर दिया जाएगा। इससे वेतन संरचना अधिक पारदर्शी बनेगी।
उद्योग और कर्मचारियों दोनों के लिए लाभकारी कदम
इन श्रम संहिताओं से कार्यस्थलों पर नियम स्पष्ट होंगे, विवादों में कमी आएगी और उद्योगों के संचालन में सरलता बढ़ेगी। साथ ही कर्मचारियों के अधिकार और सुविधाएँ कानूनी रूप से सुरक्षित होंगी। सरकार का मानना है कि यह बदलाव देश में बेहतर कार्यसंस्कृति और उत्पादकता को प्रोत्साहित करेगा।
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