आज चैत्र नवरात्र का तीसरा दिन है, जो मां चंद्रघंटा को समर्पित है। मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा रूप मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में स्थित होता है, जिससे साहस, आत्मविश्वास और निर्भयता में वृद्धि होती है।
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्राकार घंटी जैसी आकृति होती है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और स्वर्ण के समान चमकदार माना जाता है। मां के दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं और उनका वाहन सिंह है, जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है। माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भय, दुख, रोग और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा जीवन की बाधाओं का नाश होता है।
मां चंद्रघंटा की इस योग में करें उपासना
चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन रवि योग का संयोग बन रहा है। रवि योग रात 12 बजकर 37 मिनट से शुरू होकर 22 मार्च की सुबह 6 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भक्त माता चंद्रघंटा की पूजा-उपासना कर सकते हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजन विधि
इस दिन सबसे पहले एक साफ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पास में कलश रखकर उस पर नारियल रखें। चंदन, रोली, हल्दी, फूल, दूर्वा आदि से पूजा करें। माता को दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाएं। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
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