नई दिल्ली. दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। केरल में प्रवेश के बाद अपेक्षाकृत कम समय में मानसून ने देश के बड़े भूभाग को कवर कर लिया है। मौसम विभाग के अनुसार अब तक देश के 19 राज्यों में मानसून अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और आगे बढ़ने की प्रक्रिया लगातार जारी है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अनुकूल वातावरण और सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण मानसून की प्रगति सामान्य से अधिक तेज बनी हुई है। यही वजह है कि कई क्षेत्रों में वर्षा गतिविधियों में अचानक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जल्द होगी मानसून की दस्तक
मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार अगले 48 घंटों के भीतर मानसून उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्सों में प्रवेश कर सकता है। वर्तमान में मानसून झारखंड और ओडिशा के अतिरिक्त क्षेत्रों तक पहुंच चुका है और उसकी अग्रिम रेखा तेजी से उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रही है। यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं तो इन दोनों राज्यों में व्यापक वर्षा गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। किसानों, प्रशासन और आम नागरिकों की नजरें अब मानसून की इस संभावित प्रगति पर टिकी हुई हैं।
19 राज्यों में भारी बारिश और मौसमीय गतिविधियों का अलर्ट
मानसून की सक्रियता के साथ-साथ देश के अनेक हिस्सों में भारी बारिश, गरज-चमक, तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका भी बढ़ गई है। मौसम विभाग ने कई राज्यों में सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है। विशेष रूप से उत्तर, मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का रुख आक्रामक बना रह सकता है। कई स्थानों पर अल्प समय में भारी वर्षा होने से जलभराव, यातायात बाधित होने और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है।
तीन बड़े मौसमी तंत्र बना रहे हैं असामान्य स्थिति
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान समय में आकाशीय परिस्थितियों को प्रभावित करने वाले तीन महत्वपूर्ण मौसमी तंत्र एक साथ सक्रिय हैं। उत्तरी हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित हुआ है, जो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त एक निम्न दबाव क्षेत्र भी वातावरण में नमी और अस्थिरता को बढ़ा रहा है। इन प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से उत्तर भारत के अनेक हिस्सों में मौसम तेजी से बदल रहा है और वर्षा गतिविधियां बढ़ रही हैं।
राजस्थान से बांग्लादेश तक बनी लंबी ट्रफ रेखा
वर्तमान मौसमीय परिस्थितियों का एक महत्वपूर्ण कारण राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश, उत्तरी छत्तीसगढ़, झारखंड, गंगा के मैदानी क्षेत्रों और बांग्लादेश तक फैली लंबी ट्रफ रेखा भी है। यह रेखा वातावरण में नमी को आकर्षित कर रही है और मानसून को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी कारण मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बादलों की सक्रियता लगातार बनी हुई है। यह स्थिति आगामी दिनों में वर्षा की तीव्रता को और बढ़ा सकती है।
पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण का दोहरा प्रभाव
पश्चिमी राजस्थान से सटे मध्य पाकिस्तान के ऊपर भी ऊपरी हवाओं का एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय बना हुआ है। यह प्रणाली पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के साथ मिलकर मौसम को और अधिक अस्थिर बना रही है। परिणामस्वरूप उत्तर-पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों में तेज हवाएं, गरज-चमक और वर्षा की स्थितियां बन रही हैं। मौसम विभाग का मानना है कि इन प्रणालियों की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, जिससे कई राज्यों में मौसम सामान्य से अधिक प्रभावशाली रहेगा।
किसानों और आम नागरिकों के लिए सतर्कता जरूरी
मानसून की प्रगति जहां कृषि क्षेत्र के लिए राहत का संदेश लेकर आती है, वहीं अत्यधिक वर्षा और तेज हवाएं कई बार नुकसान का कारण भी बन जाती हैं। मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने और मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है। वहीं आम नागरिकों को भी आकाशीय बिजली, तेज आंधी और जलभराव जैसी संभावित परिस्थितियों से सावधान रहने को कहा गया है। विशेष रूप से खुले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से रुकने से बचने की सलाह दी गई है।
अगले कुछ दिन तय करेंगे मानसून की अगली दिशा
मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले कुछ दिन मानसून की आगे की गति और तीव्रता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। यदि वर्तमान मौसमी प्रणालियां सक्रिय बनी रहती हैं तो मानसून और अधिक तेजी से उत्तर भारत के शेष हिस्सों की ओर बढ़ सकता है। इसके साथ ही कई राज्यों में वर्षा गतिविधियों की तीव्रता भी बढ़ सकती है। फिलहाल देशभर में मौसम पर करीबी नजर रखी जा रही है और बदलती परिस्थितियों के अनुसार लगातार नए पूर्वानुमान जारी किए जा रहे हैं।