काठमांडू: तिब्बत-नेपाल सीमा के पास बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचा दी। तिब्बत से शुरू हुई इस आपदा का असर नेपाल के रसुवा, धादिंग, नुवाकोट, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी और चितवन समेत कई निचले इलाकों में देखने को मिला है। गुरुवार को मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान तेज किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस आपदा में बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। अब तक 392 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। बाढ़ के तेज बहाव में कई शव बहकर मैदानी इलाकों तक पहुंच गए हैं। अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने के बाद कई शवों को अस्थायी तंबुओं में रखा गया है।
756 लोगों को बचाया गया, 54 भारतीय सुरक्षित
अब तक 756 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 54 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हालांकि, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 290 भारतीय तीर्थयात्रियों की तलाश अभी जारी है। बचाए गए लोगों में त्रिशूली-1 परियोजना के 33 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं। हालात का जायजा लेने के लिए चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग और नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
20 से ज्यादा पुल और 40 किलोमीटर हाईवे तबाह
बाढ़ के कारण 20 से ज्यादा पुल और करीब 40 किलोमीटर हाईवे बह गए हैं। इसके चलते कई इलाकों का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क टूट गया है। दुर्गम इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है और अधिकांश बचाव अभियान हेलीकॉप्टरों की मदद से चलाया जा रहा है। नेपाल में कुल 13,295 सुरक्षाकर्मियों को राहत और बचाव अभियान में लगाया गया है। वहीं, चीन की ओर से 141 बचावकर्मी तैनात किए गए हैं। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की वेस्टर्न थिएटर कमांड की एक टीम को भी प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है। नेपाल के गृह मंत्री सूधन गुरुंग के अनुसार, करीब 550 विदेशी नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। कुल मिलाकर 910 लोगों के लापता होने या उनसे संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई है।
कई गांव पूरी तरह तबाह
रेडक्रॉस के मुताबिक, बाढ़ में कई गांव पूरी तरह तबाह हो गए हैं। सड़क और पुल टूटने के कारण प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क कट गया है। राहत सामग्री और जरूरी सामान पहुंचाने में भी बचाव एजेंसियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन में 132, नवलपरासी ईस्ट में 82, धादिंग में 33, गोरखा में 30, नुवाकोट में 28, तनहुं में 22, रसुवा में 17 और नवलपरासी वेस्ट में 15 शव बरामद किए गए हैं।
290 भारतीय समेत सैकड़ों विदेशी नागरिक लापता
लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की है। इसके अलावा अमेरिका के 65, यूक्रेन के 53, मलेशिया के 51, ऑस्ट्रेलिया के 35 और ब्रिटेन के 33 नागरिकों के लापता होने की सूचना है। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल की तरफ करीब 100 चीनी नागरिक भी लापता हैं। उधर, चीन के तिब्बत क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी में भी बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। यहां तीन लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की सूचना है।
50 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से बहा मलबा
चीनी सरकार के जियोलॉजिस्ट गुओ झाओचेंग के मुताबिक, बाढ़ के दौरान पानी और मलबे की रफ्तार करीब 50 मीटर प्रति सेकेंड तक पहुंच गई होगी। इतनी तेज रफ्तार के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। ग्यिरोंग सीमा क्रॉसिंग पर सामने आए वीडियो में पानी और मलबे का तेज बहाव दिखाई दे रहा है। बाढ़ के कारण नेपाल में घरों, सड़कों और बिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
एक और झील टूटने का खतरा, 72 घंटे का अलर्ट
इस बीच चीन ने एक और संभावित बाढ़ को लेकर चेतावनी जारी की है। अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल सीमा के पास छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास ग्यिरोंग से करीब 18 किलोमीटर ऊपर मलबे के कारण एक बैरियर झील बन गई है। चीनी जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक इस झील में करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका था और पानी झील से बाहर निकलने लगा था। अनुमान है कि अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी इसमें पहुंच सकता है। इससे झील के टूटने का खतरा बढ़ गया है। चीनी अधिकारी लगातार झील की निगरानी कर रहे हैं और संभावित झील टूटने की स्थिति में बाढ़ के प्रभाव का आकलन करने के लिए सिमुलेशन और जोखिम मूल्यांकन किया जा रहा है। आपात स्थिति से निपटने के लिए बचाव दल, PLA जवान, इंजीनियरिंग टीमें, दूरसंचार कर्मी और राहत संगठन तैनात किए गए हैं।
नेपाल में भी हाई अलर्ट
नेपाल ने भी नई झील के संभावित टूटने को लेकर चेतावनी जारी की है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भोटेकोशी नदी के आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है। इस बीच नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक में नेताओं ने सीमा पार ग्लेशियर और झीलों से जुड़े खतरों से निपटने के लिए चीन के साथ राजनयिक स्तर पर बातचीत बढ़ाने और नेपाल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की सिफारिश की।