नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026 | बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम सामने आने के बाद अब राजनीतिक हलकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों, 2029 के लोकसभा चुनाव, मंत्रियों के प्रदर्शन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और NDA के सहयोगी दलों के बीच संतुलन जैसे पहलुओं को संभावित बदलाव में अहम माना जा रहा है। हालांकि अभी सरकार या बीजेपी ने फेरबदल की तारीख अथवा उसके स्वरूप को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार
केंद्रीय मंत्रिपरिषद में हाल में एक महत्वपूर्ण बदलाव हो चुका है। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक आदेश के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा 25 जुलाई को स्वीकार कर लिया गया था। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इससे प्रह्लाद जोशी के पास उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के साथ शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी आ गई है। ऐसे में संभावित फेरबदल में शिक्षा मंत्रालय को पूर्णकालिक मंत्री मिलने पर भी नजर रहेगी।
कई वरिष्ठ मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय
मौजूदा मंत्रिपरिषद में कई वरिष्ठ नेताओं के पास एक से अधिक मंत्रालय हैं। अमित शाह गृह मंत्रालय के साथ सहकारिता मंत्रालय संभाल रहे हैं। जेपी नड्डा के पास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के साथ रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय है। शिवराज सिंह चौहान कृषि एवं किसान कल्याण के साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय संभाल रहे हैं। अश्विनी वैष्णव के पास रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे तीन महत्वपूर्ण मंत्रालय हैं। इसके अलावा निर्मला सीतारमण के पास वित्त और कॉरपोरेट कार्य, जबकि मनोहर लाल के पास आवास एवं शहरी कार्य और बिजली मंत्रालय की जिम्मेदारी है। संभावित फेरबदल में कुछ मंत्रियों का कार्यभार कम किए जाने की चर्चा है, लेकिन इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
युवाओं और महिलाओं को मिल सकता है मौका?
बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम और भविष्य की चुनावी रणनीति को देखते हुए मंत्रिपरिषद में युवा चेहरों को आगे लाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। महिलाओं और अलग-अलग सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना भी संभावित समीकरणों में शामिल माना जा रहा है। हालांकि किस नेता को शामिल किया जाएगा या किस मंत्री की जिम्मेदारी बदलेगी, इसे लेकर सामने आ रहे नाम फिलहाल राजनीतिक अटकलों के दायरे में हैं। आधिकारिक घोषणा से पहले किसी संभावित नेता का नाम तय मानना उचित नहीं होगा।
यूपी, गुजरात से MP-महाराष्ट्र तक समीकरण अहम
संभावित फेरबदल में राज्यों का प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण हो सकता है। उत्तर प्रदेश केंद्र की राजनीति में सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाला राज्य है। गुजरात प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जबकि पंजाब में पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के राजनीतिक समीकरण भी मंत्रिपरिषद में बदलाव के दौरान विचार का विषय हो सकते हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर खास ध्यान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
NDA के सहयोगी दलों पर भी नजर
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में बीजेपी के साथ NDA के सहयोगी दलों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मौजूदा कैबिनेट में टीडीपी के राममोहन नायडू नागरिक उड्डयन मंत्री हैं, जेडीयू के राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह पंचायती राज तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय संभाल रहे हैं। एचडी कुमारस्वामी के पास भारी उद्योग और इस्पात मंत्रालय है, जबकि चिराग पासवान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हैं। संभावित विस्तार में सहयोगी दल अतिरिक्त प्रतिनिधित्व की मांग कर सकते हैं। हालांकि शिवसेना, टीडीपी या किसी अन्य सहयोगी दल को अतिरिक्त मंत्रालय मिलने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या 12 नए मंत्री शामिल हो सकते हैं?
संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के मुताबिक प्रधानमंत्री समेत केंद्रीय मंत्रिपरिषद की कुल संख्या लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 543 सदस्यीय लोकसभा के हिसाब से अधिकतम संख्या 81 होती है। लेकिन उपलब्ध सरकारी सूची के आधार पर मंत्रियों की वास्तविक मौजूदा संख्या को किसी पुराने आंकड़े से तय करना सही नहीं होगा। PMO की हाल में अपडेट की गई सूची में कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और राज्य मंत्रियों का विस्तृत विवरण उपलब्ध है। इसलिए “12 मंत्री निश्चित रूप से शामिल किए जाएंगे” कहना सही नहीं है। संवैधानिक सीमा तक रिक्त स्थान होना केवल विस्तार की गुंजाइश दिखाता है, वास्तविक नियुक्तियों की संख्या प्रधानमंत्री के निर्णय पर निर्भर करेगी।
क्या जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू मंत्रिपरिषद से हट गए हैं?
प्राप्त प्रारंभिक जानकारी में दावा किया गया था कि जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद मंत्रिपरिषद से बाहर हो गए हैं। लेकिन PMO की 25 अगस्त तक अपडेट की गई आधिकारिक सूची में जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह दोनों केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में दर्ज हैं। जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक कार्य तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। रवनीत सिंह खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और रेलवे मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में सूचीबद्ध हैं। इसलिए दोनों को वर्तमान में मंत्रिपरिषद से बाहर बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
फेरबदल कब होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल कब होगा। राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा पिछले कुछ महीनों से चल रही है और बीजेपी की नई टीम के गठन के बाद अटकलों को फिर बल मिला है। हाल में उद्योग जगत के कुछ बड़े नामों तक को संभावित मंत्रिपरिषद बदलाव से जोड़कर देखा गया है। लेकिन राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय या बीजेपी ने अभी किसी तारीख की घोषणा नहीं की है। इसलिए “फेरबदल तय है” के बजाय “फेरबदल की अटकलें/चर्चा तेज” लिखना तथ्यात्मक रूप से अधिक सुरक्षित है।