पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल चरम पर है। जिले की 33 सीटों में ज्यादातर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा मुकाबला है, लेकिन अमडांगा और देगंगा सीटें इस बार खास चर्चा में हैं। दोनों ही सीटें अल्पसंख्यक बहुल हैं और यहां चुनावी समीकरण अलग नजर आ रहे हैं।
अमडांगा में त्रिकोणीय मुकाबला, ममता की बड़ी सभा
अमडांगा सीट पर इस बार तृणमूल, भाजपा और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के बीच त्रिकोणीय लड़ाई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार दोपहर 1 बजे साधनपुर मैदान में तृणमूल उम्मीदवार काशेम सिद्दीकी के समर्थन में जनसभा करेंगी। इस सीट पर अल्पसंख्यक वोटरों की संख्या अधिक है और वोटर लिस्ट से नाम कटने का मुद्दा भी चर्चा में है।
देगंगा में TMC vs ISF सीधी टक्कर, अभिषेक का कार्यक्रम
अमडांगा के बाद देगंगा में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दोपहर 3 बजे नुरनगर पंचायत के बेनापोल ईंट भट्ठा मैदान में जनसभा करेंगे। यहां तृणमूल उम्मीदवार अनीसुर रहमान के समर्थन में प्रचार होगा। देगंगा में मुख्य मुकाबला तृणमूल और ISF के बीच माना जा रहा है।
अमित शाह की हाबरा में रैली, मुकाबला हुआ तेज
इसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हाबरा में जनसभा करेंगे। वे भाजपा उम्मीदवार देवदास मंडल और अशोकनगर के सुमय हीरा के समर्थन में प्रचार करेंगे। एक ही दिन में बड़े नेताओं की रैलियों से जिले का सियासी तापमान बढ़ गया है।
अमडांगा में उम्मीदवार बदलना बना रणनीतिक फैसला
तृणमूल ने अमडांगा से तीन बार के विधायक रफीकार रहमान का टिकट काटकर फुरफुरा शरीफ के पीरजादा काशेम सिद्दीकी को उम्मीदवार बनाया है। शुरुआत में नाराजगी के बावजूद रफीकार अब पार्टी के निर्देश पर उनके समर्थन में प्रचार कर रहे हैं, हालांकि अंदरूनी असंतोष की चर्चा बनी हुई है। इसे तृणमूल का बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
देगंगा में बगावत से बदले समीकरण
देगंगा सीट पर तृणमूल के अंदरूनी असंतोष ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। टिकट न मिलने से नाराज मफिदुल हक साहाजी ISF में शामिल होकर उम्मीदवार बन गए हैं। इससे यहां तृणमूल और ISF के बीच सीधी टक्कर बन गई है। तृणमूल उम्मीदवार अनीसुर रहमान अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।