नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्र सरकार देश की अर्थव्यवस्था को अधिक सुदृढ़, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सचिव अपने-अपने विभागों की चुनौतियों, सुधार संबंधी सुझावों और दीर्घकालिक विकास रणनीति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे। माना जा रहा है कि इस मंथन के आधार पर प्रशासनिक सुधारों और आर्थिक नीतियों के अगले चरण की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
सात उच्चस्तरीय समूहों की रिपोर्ट पर होगी विस्तृत चर्चा
सूत्रों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद मंत्रिमंडल सचिव के नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों के अध्ययन के लिए सात उच्चस्तरीय सचिव समूह गठित किए गए थे। इन समूहों ने ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, आयात-निर्यात, महंगाई, रक्षा उत्पादन, औद्योगिक विकास और आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों पर व्यापक अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। अब इन रिपोर्टों का प्रस्तुतिकरण प्रधानमंत्री के समक्ष किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य केवल मौजूदा चुनौतियों का समाधान करना नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप देश की आर्थिक और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत बनाना भी है।
सचिवों को दिए गए तीन प्रमुख कार्य
बैठक से पहले सभी सचिवों को तीन महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पहला विषय अपने-अपने मंत्रालयों और विभागों के कार्यों में आने वाली बाधाओं की पहचान तथा उनके व्यावहारिक समाधान से जुड़ा है। दूसरा विषय विभागीय सीमाओं से आगे बढ़कर समन्वित कार्यप्रणाली विकसित करने का है, ताकि विभिन्न मंत्रालय साझा लक्ष्यों की दिशा में बेहतर तालमेल के साथ काम कर सकें। तीसरे विषय के अंतर्गत सचिवों से अपेक्षा की गई है कि वे केवल अपने विभाग तक सीमित न रहते हुए अन्य मंत्रालयों और क्षेत्रों में सुधार के लिए भी रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करें। सरकार का मानना है कि इस प्रकार का समग्र दृष्टिकोण नीति निर्माण को अधिक प्रभावी बना सकता है।
ऊर्जा, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला पर रहेगा विशेष जोर
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक उत्पादन, विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। आर्थिक मामलों के सचिव के नेतृत्व वाला सबसे बड़ा समूह व्यापक आर्थिक स्थिरता, निवेश, आयात-निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े सुझाव प्रस्तुत करेगा। वहीं पेट्रोलियम क्षेत्र से संबंधित समूह ऊर्जा संसाधनों, प्राकृतिक गैस, रसोई गैस तथा पेट्रोलियम उत्पादों की दीर्घकालिक उपलब्धता और रणनीतिक सुरक्षा पर अपने विचार रखेगा। इसके अतिरिक्त रक्षा, विदेश नीति और समुद्री परिवहन से जुड़े समूह भी अपने-अपने क्षेत्रों में सुधार संबंधी सुझाव प्रस्तुत करेंगे।
निवेश और कारोबार को सरल बनाने पर भी रहेगा फोकस
सरकार पिछले एक दशक में कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए अनेक सुधार लागू कर चुकी है, लेकिन उद्योग जगत की ओर से अब भी भूमि, अनुमति, लॉजिस्टिक और विभिन्न विभागीय प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता जताई जाती रही है। ऐसे में इस बैठक में निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को और सरल बनाने, उद्योगों की लागत कम करने तथा लॉजिस्टिक ढांचे को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने पर भी गंभीर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति श्रृंखला और परिवहन व्यवस्था को अधिक कुशल बनाया जाता है तो भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने की दिशा में अहम कदम
सरकार की दीर्घकालिक विकास रणनीति में प्रशासनिक दक्षता, तकनीकी नवाचार, निवेश प्रोत्साहन और संस्थागत समन्वय को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। सचिवों की यह बैठक केवल विभागीय समीक्षा तक सीमित नहीं होगी, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को समयबद्ध रूप से प्राप्त करने के लिए शासन व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में प्राप्त सुझावों के आधार पर आने वाले समय में विभिन्न मंत्रालयों में नीतिगत और संरचनात्मक सुधारों का नया चरण शुरू किया जा सकता है।