अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि रेलवे में विज्ञापन और ब्रांडिंग से राजस्व बढ़ाने की योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन इन सबके बीच कानून का पालन सर्वोपरि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराब, तंबाकू और धूमपान से जुड़े विज्ञापनों को किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी।
कानून के दायरे में ही विज्ञापन की अनुमति
मंत्री ने कहा कि विज्ञापन प्रदर्शित करने वाली एजेंसियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे केंद्र और राज्य के सभी संबंधित कानूनों का पालन करें। जो विज्ञापन कानून की नजर में आपत्तिजनक माने जाते हैं, उन्हें रेलवे परिसरों या संपत्तियों पर प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है। यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
गैर-किराया राजस्व बढ़ाने की रणनीति
भारतीय रेलवे ने गैर-किराया राजस्व बढ़ाने के लिए विभिन्न विज्ञापन और ब्रांडिंग पहलें शुरू की हैं। इसके तहत रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों और अन्य परिसंपत्तियों का उपयोग विज्ञापन के लिए किया जाता है। यह रणनीति रेलवे की आय बढ़ाने और सेवाओं में सुधार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
‘आउट-ऑफ-होम’ नीति के तहत अवसर
रेलवे की ‘आउट-ऑफ-होम’ विज्ञापन नीति के तहत स्टेशनों से जुड़े क्षेत्रों में विज्ञापन देने के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अलावा ‘रेल डिस्प्ले नेटवर्क’ नीति के माध्यम से डिजिटल स्क्रीन और डिस्प्ले सिस्टम के जरिए आधुनिक विज्ञापन सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं। इससे विज्ञापन क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल रही हैं।
चल संपत्तियों पर भी ब्रांडिंग की सुविधा
रेलवे ने अपनी चल संपत्तियों, जैसे ट्रेनों और कोचों के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर विज्ञापन की अनुमति दी है। यह एक प्रभावी माध्यम है, जिससे कंपनियां व्यापक स्तर पर अपने उत्पादों का प्रचार कर सकती हैं। हालांकि, इस सुविधा के बावजूद नियमों का पालन अनिवार्य रहेगा।
सार्वजनिक हित सर्वोपरि
सरकार का यह निर्णय इस बात को दर्शाता है कि राजस्व बढ़ाने के प्रयासों के साथ-साथ सार्वजनिक हित और सामाजिक जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता दी जा रही है। शराब और तंबाकू जैसे उत्पादों के विज्ञापनों पर रोक लगाकर रेलवे एक सकारात्मक संदेश देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
संतुलन और जिम्मेदारी की दिशा में कदम
रेलवे की यह नीति दर्शाती है कि आर्थिक लाभ और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना संभव है। विज्ञापन के जरिए आय बढ़ाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले तत्वों को बढ़ावा न मिले।