पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच रामनवमी को लेकर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी के साथ-साथ अब तृणमूल कांग्रेस भी इस पर्व को बड़े पैमाने पर मनाकर जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही है।
इस बार रामनवमी 26 और 27 मार्च—दो दिनों में मनाई जा रही है, जिसके चलते नेताओं ने अपने कार्यक्रमों को अलग-अलग हिस्सों में बांट लिया है और राज्यभर में तैयारियां जोरों पर हैं।
खड़गपुर में दिलीप घोष भव्य आयोजन की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें जुलूस के साथ लाठी खेल, हथियार प्रदर्शन, लड्डू वितरण और मेले का आयोजन भी शामिल है।
तैयारियों के बीच कोलकाता के बड़ा बाजार में झंडा-बैनर खरीद को लेकर बीजेपी नेताओं के बीच हल्की खींचतान भी देखने को मिली, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई।
सुकांत मजूमदार, शुभेंदु अधिकारी और अग्निमित्रा पॉल समेत कई बड़े नेता अलग-अलग जिलों में जुलूस और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जबकि आसनसोल में 26 से 30 मार्च तक कार्यक्रम चलने की योजना है।
उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर, पुरुलिया और बारासात जैसे इलाकों में बड़े जुलूसों की तैयारी की जा रही है, हालांकि पुरुलिया में बीजेपी ने पुलिस पर अनुमति रोकने का आरोप लगाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि के मौके पर मां काली को लेकर पोस्ट साझा किया, वहीं बीजेपी नेताओं ने भी मंदिरों में पूजा-अर्चना कर धार्मिक जुड़ाव को मजबूत करने की कोशिश की।
दूसरी ओर, टीएमसी भी इस मौके से दूरी नहीं बना रही है। पार्टी के नेता और उम्मीदवार व्यक्तिगत रूप से रामनवमी कार्यक्रमों में शामिल होकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
कोलकाता में करीब 60 छोटे-बड़े जुलूस निकलने की संभावना है, जिनमें 6 से 7 बड़े जुलूस होंगे। इसे देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।
पुलिस कमिश्नर की निगरानी में हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और बड़े जुलूसों में डीसी स्तर के अधिकारी नजर रखेंगे ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
ट्रैफिक पुलिस ने भी एडवाइजरी जारी की है, जिसके तहत 26 और 27 मार्च को कुछ समय के लिए मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी और जरूरत के अनुसार अन्य वाहनों को नियंत्रित किया जाएगा।
पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी है और प्रशासन का उद्देश्य है कि रामनवमी का पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो।