नई दिल्ली. देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट में आज सीईसी ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग और कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना फैसले लेने के आयोग के तरीके को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू होगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ फैसले की सुनवाई करेंगे। याचिका में सीईसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का भी आदेश मांगा गया है। पूरे मामले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों का जवाब अदालत में दिया जाएगा।
जस्टिस उज्जल भुइंया का अहम बयान
एसआईआर से जुड़े फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट के एक जज का अहम बयान सामने आया है। जस्टिस उज्जल भुइंया ने रविवार को हैदराबाद स्थित नालसार विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में कहा है कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया जिसके परिणामस्वरूप लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाता है स्वाभाविक रूप से मनमानी होगी और संविधान के तहत स्थापित संवैधानिक व्यवस्था का निषेध होगी। उन्होंने कहा था कि संविधान नागरिकों के दो वर्गों में नहीं बांटता। उनका यह भी कहना था कि बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन है। इस बयान ने एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा को नया आयाम दिया है।
याचिका में शामिल मुख्य मुद्दे
सीईसी के खिलाफ याचिका में फॉर्म 6 में किए गए बदलाव का मुद्दा भी शामिल है। आरोप है कि पैतृक जानकारी और पिछले एसआईआर से जुड़ाव की जरूरत को आयोग के सॉफ्टवेयर के जरिए लागू कर दिया गया। नियमों के मुताबिक इसके लिए आवश्यक कानूनी संशोधन जरूरी था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए किए गए बदलाव से कई पात्र मतदाता प्रभावित हुए। चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और सामूहिकता की कमी का आरोप लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगा। मामले का नतीजा चुनाव प्रक्रिया पर असर डाल सकता है।
निलंबन और आपराधिक कार्रवाई की मांग
याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की गई है। साथ ही अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना फैसले लेने के तरीके को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने सीईसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का भी आदेश मांगा है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हुए कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत इन मांगों पर विचार करेगी। पूरे मामले में संवैधानिक प्रावधानों और चुनाव आयोग की स्वायत्तता दोनों पक्षों से दलीलें पेश की जाएंगी। सुनवाई का नतीजा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
एसआईआर विवाद और आगे की स्थिति
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विवाद पिछले कई दिनों से चर्चा में है। मताधिकार से वंचित होने के आरोपों ने राजनीतिक और कानूनी बहस छेड़ दी है। जस्टिस उज्जल भुइंया के बयान ने इस चर्चा को और तेज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई में इन सभी पहलुओं पर प्रकाश पड़ने की उम्मीद है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और नागरिकों के मताधिकार दोनों ही संवैधानिक महत्व के विषय हैं। अदालत का रुख आगे की प्रक्रिया तय करेगा। पूरे देश की नजर इस सुनवाई पर टिकी हुई है।