नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास तरंग शक्ति में स्वदेशी तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट फ्रांस का राफेल अमेरिका का एफ-35ए लाइटनिंग II स्टेल्थ फाइटर और रूसी निर्मित सुखोई जेट एक साथ एक फॉर्मेशन में उड़े। भारतीय वायुसेना ने एक्स पर साझा किए वीडियो में इन लड़ाकू विमानों को एक साथ उड़ान भरते दिखाया गया। यह दृश्य अभ्यास की भव्यता और इंटरऑपरेबिलिटी को दर्शाता है। जोधपुर में आयोजित इस अभ्यास में विभिन्न देशों के विमानों का समन्वय बेहद प्रभावशाली रहा। विशेषज्ञों ने इसे हवाई ताकत के प्रदर्शन के रूप में सराहा। वीडियो ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा पैदा की।
अभ्यास में शामिल देश और विमान
तरंग शक्ति में सात अन्य वायुसेनाओं की भागीदारी है। अमेरिका फ्रांस जर्मनी संयुक्त अरब अमीरात ऑस्ट्रेलिया बांग्लादेश और श्रीलंका के विमान और एयर एसेट्स शामिल हैं। इसके अलावा 32 ऑब्जर्वर देशों ने भी अभ्यास को करीब से देखा जिनमें ब्राजील मिस्र इटली जापान मलेशिया ओमान सिंगापुर दक्षिण अफ्रीका थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। विदेशी विमानों में एफ-35 एफ-16 राफेल ए400एम ए330 एमआरटीटी केसी-135 सी-130 और अन्य विशेष प्लेटफॉर्म शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 राफेल जैगुआर मिराज-2000 मिग-29 एलसीए एमके-1 एमआई-35 एमआई-17 और आईएल-78 रिफ्यूलर भी साथ उड़ान भर रहे हैं। पहली बार एफ-35 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान भारत में किसी अभ्यास में शामिल हुए हैं।
अभ्यास का दायरा और मिशन
जोधपुर में चल रहे इस अभ्यास में 80 से अधिक भारतीय और विदेशी विमान तथा करीब 1500 कर्मी शामिल हैं जिनमें एयरक्रू तकनीशियन और ग्राउंड स्टाफ शामिल हैं। अभ्यास में विजुअल-रेंज और बियॉन्ड-विजुअल-रेंज कॉम्बैट मिशन हाई-वैल्यू एरियल एसेट्स की एंगेजमेंट एयर मोबिलिटी ऑपरेशन डायनामिक टारगेटिंग एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग और कॉम्बैट सर्च एंड रस्क्यू मिशन शामिल हैं। विभिन्न देशों के विमानों के बीच समन्वय और साझा मिशन अभ्यास का मुख्य फोकस है। यह बहुराष्ट्रीय माहौल वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों का अनुभव प्रदान करता है। कर्मी संयुक्त ब्रीफिंग और डीब्रीफिंग के जरिए अनुभव साझा कर रहे हैं।
एफ-35 की पहली भागीदारी का महत्व
इस अभ्यास में अमेरिकी एफ-35ए लाइटनिंग II की भागीदारी खास है क्योंकि यह पहली बार भारत में किसी अभ्यास में शामिल हुआ है। स्टेल्थ क्षमता वाले इस पांचवीं पीढ़ी के विमान का तेजस और अन्य प्लेटफॉर्म के साथ उड़ना इंटरऑपरेबिलिटी का बेहतरीन उदाहरण है। भारतीय वायुसेना के स्वदेशी तेजस का इन अत्याधुनिक विमानों के साथ समन्वय आत्मनिर्भरता और वैश्विक साझेदारी दोनों को दर्शाता है। फ्रांसीसी राफेल और रूसी सुखोई के साथ मिलकर यह फॉर्मेशन विविध प्लेटफॉर्म की एकजुटता दिखाता है। अभ्यास से भारतीय वायुसेना को नई रणनीतियां विकसित करने का अवसर मिल रहा है।
तरंग शक्ति का व्यापक संदेश
तरंग शक्ति भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय अभ्यास है जो साझेदारी में शक्ति का संदेश देता है। विभिन्न देशों के विमानों और कर्मियों के बीच विश्वास और समन्वय को मजबूत करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। जोधपुर के आसमान में दिखे इन फॉर्मेशन ने न केवल तकनीकी क्षमता बल्कि कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत किया है। अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चल रहा है। इसमें शामिल देशों और ऑब्जर्वर राष्ट्रों की संख्या इसकी वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है। भारतीय वायुसेना की तैयारियों और स्वदेशी क्षमताओं का प्रदर्शन इस अभ्यास की सफलता का प्रतीक है।