सनातन धर्म में सीता नवमी का विशेष महत्व है। इसे जानकी जयंती भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता का जन्म हुआ था। इस दिन उनकी पूजा करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 से 05:02
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 से दोपहर 12:45
- सायाह्न संध्या: शाम 06:53 से 07:58
- निशिता मुहूर्त: रात 11:57 से 12:41
- अमृत काल: शाम 06:29 से रात 08:04
पूजा विधि (Puja Vidhi)
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ लाल या पीले वस्त्र पहनें
- व्रत और पूजा का संकल्प लें
- घर के मंदिर में माता सीता और भगवान राम की मूर्ति/तस्वीर स्थापित करें
- चंदन से तिलक कर फल, फूल, माला, मिठाई और जल अर्पित करें
- घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप करें
- अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें
- नवमी तिथि समाप्त होने के बाद व्रत का पारण करें
सीता नवमी के मंत्र (Mantras)
- श्री सीतायै नमः।।
- श्री सीतारामाभ्यां नमः।।
- ॐ ह्लीं श्रीं सीतायै नमः।।
क्या मिलता है इस दिन पूजा से?
मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से
- अखंड सौभाग्य
- वैवाहिक सुख
- धन-समृद्धि
- जीवन में सकारात्मकता
- का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सीता नवमी का दिन श्रद्धा और भक्ति से पूजा-अर्चना करने का विशेष अवसर है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।