हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा सीधे तौर पर देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। तुलसी की माला पहनना आध्यात्मिक रूप से बेहद पुण्यदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति तुलसी माला पहनते हैं, उन पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है। लेकिन तुलसी माला सिर्फ एक आभूषण नहीं है, यह पवित्रता और सात्विकता का प्रतीक है। अक्सर लोग फैशन या दूसरों को देखकर इसे पहन लेते हैं, लेकिन इसके नियमों का पालन नहीं करते। ऐसा करने से तुलसी माला का लाभ कम हो सकता है, और शास्त्रों के अनुसार दोष भी लग सकता है।
तुलसी माला पहनने में होने वाली आम गलतियां-
- अशुद्ध भोजन करना – तुलसी माला पहनते समय मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से बचना चाहिए। तुलसी देवी सात्विकता की प्रतिक हैं।
- जप और पहनने वाली माला एक करना – जिस माला से आप मंत्र जाप करते हैं, उसे गले में न पहनें। जप की माला हमेशा अलग होनी चाहिए और गोमुखी में रखी जाए।
- अपवित्र स्थान पर पहनना – किसी अशुद्ध या अपवित्र स्थान पर जाने से पहले माला उतारें और उसे पवित्र स्थान पर रखें। अगर भूल से पहन ली, तो उसे गंगाजल से शुद्ध कर लें।
- तुलसी और रुद्राक्ष एक साथ पहनना – ज्योतिष के अनुसार, तुलसी और रुद्राक्ष माला को एक ही धागे में नहीं पहनना चाहिए।
तुलसी माला पहनने की सही विधि-
- माला पहनने से पहले इसे गंगाजल और पंचामृत से धोएं।
- इसके बाद इसे भगवान विष्णु के चरणों में रखकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- पहनने के लिए सोमवार, बुधवार और गुरुवार को शुभ माना गया है।
- माला को समय-समय पर साफ करें, ताकि पवित्रता बनी रहे।
तुलसी माला पहनने के फायदे-
- मन को शांति मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- तुलसी जी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इसे पहनने वाले पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
- यह सात्विकता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है।
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