मुल्लांपुर - भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच में वॉशिंगटन सुंदर ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। सुंदर ने पहले बल्ले से अर्धशतक जड़ा और फिर गेंदबाजी में कमाल दिखाते हुए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 100 विकेट पूरे कर लिए।
बल्ले से खेली नाबाद अर्धशतकीय पारी
वॉशिंगटन सुंदर ने भारतीय पारी के दौरान शानदार बल्लेबाजी करते हुए 68 गेंदों में नाबाद 52 रन बनाए। अपनी पारी में उन्होंने पांच चौके और एक छक्का लगाया। उनके अर्धशतक पूरा करते ही कप्तान शुभमन गिल ने पारी घोषित कर दी। सुंदर की यह पारी भारत के विशाल स्कोर को और मजबूत बनाने में अहम साबित हुई।
गेंदबाजी में हासिल की बड़ी उपलब्धि
बल्ले से योगदान देने के बाद सुंदर ने गेंद से भी प्रभाव छोड़ा। अफगानिस्तान की दूसरी पारी में पहला विकेट लेते ही उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपने 100 विकेट पूरे कर लिए। इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए उन्होंने केवल 46 प्रथम श्रेणी मैच खेले। सुंदर ने दूसरी पारी में शुरुआती ओवरों में ही अफगान बल्लेबाजों को परेशान किया और टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाईं।
टेस्ट क्रिकेट में भी लगातार बढ़ रहा प्रभाव
वॉशिंगटन सुंदर अब तक 17 टेस्ट मैचों में 36 विकेट हासिल कर चुके हैं। बल्लेबाजी में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में एक शतक और पांच अर्धशतक दर्ज हैं। ऑलराउंडर के रूप में उनका प्रदर्शन भारतीय टीम के लिए लगातार महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
फॉलोऑन के बाद भी संघर्ष करती रही अफगानिस्तान टीम
अफगानिस्तान की पहली पारी 152 रन पर सिमट गई, जिसके बाद उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा। दूसरी पारी में भी टीम की शुरुआत खराब रही और शुरुआती विकेट जल्दी गिर गए। भारतीय गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। पहली पारी में पदार्पण कर रहे मानव सुथार ने छह विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया था, जबकि दूसरी पारी में वॉशिंगटन सुंदर ने अपनी गेंदबाजी से अफगान बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया।
भारत के सामने पारी से जीत का मौका
अफगानिस्तान की टीम भारत के विशाल स्कोर से काफी पीछे चल रही थी और मैच पूरी तरह भारतीय टीम के नियंत्रण में नजर आया। सुंदर के ऑलराउंड प्रदर्शन और गेंदबाजों की शानदार मेहनत के दम पर भारत ने पारी से जीत की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया। वॉशिंगटन सुंदर के लिए यह मैच व्यक्तिगत और टीम दोनों स्तर पर यादगार साबित हुआ, जहां उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से अपनी उपयोगिता साबित की।