बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में जिउतिया व्रत से पहले मड़ुआ के आटे से बनी रोटी और लिट्टी खाने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। बांसडीह क्षेत्र के आसचौरा और चौकन गांवों में एक साथ कई लोगों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। उल्टी, पेट दर्द, चक्कर, कंपकंपी और शरीर में झटके जैसी शिकायतों के बाद लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। शुरुआती जानकारी में मरीजों की संख्या करीब एक दर्जन बताई गई थी, जो बढ़ते-बढ़ते 51 तक पहुंच गई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे मामले की निगरानी कर रही हैं।
एक साथ कई लोगों की बिगड़ी तबीयत
बलिया के बांसडीह इलाके के आसचौरा और चौकन गांव में मड़ुआ से बनी रोटी और लिट्टी खाने के बाद कई लोगों की तबीयत अचानक खराब हो गई। लोगों ने उल्टी, पेट दर्द, चक्कर और कंपकंपी जैसी शिकायतें कीं। कुछ मरीजों में शरीर में झटके आने की भी बात सामने आई। इसके बाद परिवार के लोग घबराकर मरीजों को अस्पताल लेकर पहुंचे। बड़ी संख्या में लोगों के एक जैसे लक्षणों के साथ बीमार पड़ने से गांवों में हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ। फिलहाल मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
एक ही दुकान से आया था मड़ुआ का आटा
जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि प्रभावित दोनों गांवों के कई परिवारों ने एक ही दुकान से मड़ुआ का आटा खरीदा था। इसी आटे से जिउतिया व्रत से पहले घरों में रोटी और लिट्टी तैयार की गई थी। खाना खाने के कुछ समय बाद ही अलग-अलग परिवारों में लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। एक जैसी शिकायतें सामने आने के बाद आटे को लेकर भी जांच शुरू की गई। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने संबंधित दुकान और आटा चक्की से मड़ुआ के आटे के नमूने लिए हैं। इसके साथ ही तैयार रोटी और लिट्टी के सैंपल भी लिए गए हैं। सभी नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है, ताकि बीमारी की वजह का पता लगाया जा सके।
आटे में क्या था? जांच रिपोर्ट से खुलेगा राज
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि लोगों के बीमार पड़ने की वास्तविक वजह क्या रही। शुरुआती जांच में एक संभावना यह सामने आई है कि जिस मड़ुआ के बीज को पिसवाकर आटा तैयार किया गया, वह कथित तौर पर बुवाई के लिए इस्तेमाल होने वाला बीज हो सकता है। कुछ रिपोर्टों में ऐसे बीज में रासायनिक पदार्थ होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी इसे बीमारी की निश्चित वजह नहीं बताया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए सैंपल की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच रिपोर्ट में आटे में किसी हानिकारक पदार्थ की मौजूदगी का पता लगाया जाएगा। इसलिए फिलहाल बीमारी की वजह को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
डीएम-एसपी पहुंचे अस्पताल और गांव
बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने की सूचना के बाद जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने मामले का जायजा लिया। दोनों अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इसके अलावा प्रभावित गांवों का भी निरीक्षण किया गया। प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव में तैनात किया गया है। अधिकारियों ने मरीजों के इलाज और उनकी स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। जरूरत के अनुसार लोगों को अस्पताल पहुंचाने और इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रशासन पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने के साथ-साथ खाद्य पदार्थ के नमूनों की जांच पर भी नजर बनाए हुए है।
49 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की पुष्टि
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक, 49 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की पुष्टि हुई है। इनमें 37 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल बताए गए हैं, जबकि 10 बच्चों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कुछ मरीजों का इलाज बांसडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी सीएचसी में चल रहा है। वहीं, कुछ लोगों को निजी अस्पतालों में भी भर्ती कराया गया है। अलग-अलग रिपोर्टों में मरीजों की संख्या 45 और 49 तक बताई गई थी। ताजा जानकारी में बीमार लोगों की संख्या बढ़कर 51 बताई जा रही है। ऐसे में प्रशासन लगातार मरीजों की संख्या और उनकी स्थिति की निगरानी कर रहा है।
पहले करीब एक दर्जन, अब 51 तक पहुंची संख्या
मामला सामने आने के शुरुआती घंटों में करीब एक दर्जन लोगों के बीमार पड़ने की जानकारी मिली थी। इसके बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती गई। अलग-अलग अपडेट में पहले 45, फिर 49 और अब 51 लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में लोगों के एक ही खाद्य पदार्थ के सेवन के बाद बीमार पड़ने से प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में निगरानी कर रही हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग भी आटे और तैयार खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच करा रहा है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे बीमारी की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।
जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी बीमारी की वजह
फिलहाल प्रशासन की ओर से मरीजों के इलाज और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रभावित लोगों को अस्पतालों में उपचार दिया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में मौजूद हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने मड़ुआ के आटे, रोटी और लिट्टी के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। इन नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खाने के बाद लोगों की तबीयत क्यों बिगड़ी। बुवाई वाले बीज के इस्तेमाल की आशंका समेत अलग-अलग पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रशासन ने घटना से जुड़े खाद्य पदार्थों और उसके स्रोत की जानकारी भी जुटानी शुरू कर दी है। फिलहाल लोगों से जुड़े घटनाक्रम पर प्रशासन की निगरानी जारी है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।