लखनऊ: उत्तरप्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच कई नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गंगा, यमुना, शारदा और सरयू समेत प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने से प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ गई है।मथुरा-वृंदावन में यमुना का पानी घाटों तक पहुंच गया है। कई घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं, जबकि वृंदावन के केशीघाट के पास परिक्रमा मार्ग में भी पानी भर गया है। दूसरी ओर, कानपुर और वाराणसी में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर धार्मिक स्थलों और घाटों पर दिखाई दे रहा है।इसी बीच मौसम विभाग ने रविवार को उत्तर प्रदेश के 52 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। ललितपुर और सोनभद्र समेत करीब 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मथुरा-वृंदावन में यमुना का पानी घाटों तक पहुंचा
मथुरा में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। वृंदावन में केशीघाट के आसपास भी जलभराव की स्थिति बन गई है। परिक्रमा मार्ग में पानी आने के बावजूद श्रद्धालु धार्मिक आस्था के चलते वहां से गुजर रहे हैं।स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि कई जगह करीब एक फीट तक पानी जमा है। ऐसे में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
कानपुर में मंदिर तक पहुंचा गंगा का पानी
कानपुर के आसपास भी गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर दिखाई दे रहा है। शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर गंगा किनारे स्थित ब्रह्मावर्त घाट पर 'ब्रह्मा की खूंटी' मंदिर का हिस्सा पानी में डूब गया है।नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण घाट और आसपास के क्षेत्रों में पानी का दबाव बढ़ रहा है। धार्मिक स्थलों के आसपास जलस्तर बढ़ने से स्थानीय लोगों में भी चिंता बनी हुई है।
वाराणसी में 84 घाटों का संपर्क प्रभावित
वाराणसी में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण कई घाट प्रभावित हुए हैं। गंगा का पानी मणिकर्णिका घाट तक पहुंच गया है। शहर के 84 प्रमुख घाटों को जोड़ने वाले रास्तों पर भी पानी भरने की स्थिति बनी हुई है।इससे कई घाटों के बीच सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है। वहीं, रत्नेश्वर महादेव मंदिर का बड़ा हिस्सा गंगा के पानी में डूब गया है और फिलहाल मंदिर का ऊपरी गुंबद ही दिखाई दे रहा है।गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ वाराणसी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और घाटों पर काम करने वाले लोगों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।
फर्रुखाबाद में 36 गांव बाढ़ की चपेट में
फर्रुखाबाद जिले में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। यहां करीब 36 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी भरने के कारण लोगों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।कई स्थानों पर लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से राहत और बचाव की तैयारियां भी बढ़ाई जा रही हैं।
बिजनौर में 11 दिनों से हाईवे पर बह रहा गंगा का पानी
बिजनौर में गंगा का जलस्तर बढ़ने से हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। पिछले 11 दिनों से गंगा का पानी स्टेट हाईवे के ऊपर से बह रहा है।बाढ़ के कारण करीब 12 गांवों में स्थिति प्रभावित हुई है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ग्रामीण इलाकों में आवागमन के लिए नाव, ट्रैक्टर और बैलगाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।लगातार जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को जरूरी सामान लाने-ले जाने और रोजमर्रा के कामों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
कई नदियों का जलस्तर बढ़ा
उत्तर प्रदेश में सिर्फ गंगा और यमुना ही नहीं, बल्कि शारदा और सरयू समेत कई अन्य नदियों में भी पानी बढ़ा हुआ है। प्रदेश की 10 से अधिक नदियां खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं।नदियों का जलस्तर बढ़ने का सबसे ज्यादा असर निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों में दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश होने पर इन क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है।
रविवार को कई शहरों में मौसम साफ
बारिश और बाढ़ के बीच रविवार सुबह लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम फिलहाल साफ नजर आया। कई जगह तेज धूप निकली, हालांकि बीच-बीच में बादल भी छाते रहे।ठंडी हवाएं चलने के कारण तापमान में ज्यादा गर्मी महसूस नहीं हुई। लेकिन मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले समय में बारिश का दौर फिर तेज हो सकता है।
52 जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने रविवार को उत्तर प्रदेश के 52 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।वहीं ललितपुर और सोनभद्र समेत 10 जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। ऐसे में निचले इलाकों, नदी किनारे के गांवों और पहले से जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सतर्कता जरूरी
लगातार बढ़ते जलस्तर और बारिश के अलर्ट को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है। जलभराव वाले रास्तों से गुजरने, तेज बहाव वाले पानी में जाने और नदी के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचना जरूरी है।फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। कुछ शहरों में धूप खिली है, तो दूसरी ओर मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में आने वाले एक-दो दिनों में नदियों के जलस्तर और बारिश की स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी।