कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं, रोजगार, शिक्षा और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़ी युवा आबादी है और यही देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था युवाओं के सामने रोजगार को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रही है।
राहुल गांधी ने युवाओं को संबोधित करते हुए दावा किया कि देश में हर 1000 युवाओं में केवल 12 लोगों को स्थायी नौकरी मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का इस्तेमाल देश के विकास में होना चाहिए, लेकिन इसके बजाय उन्हें अलग-अलग तरह के दबाव और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
'भारत के पास करीब 40 करोड़ युवा'
राहुल गांधी ने कहा कि भारत में करीब 40 करोड़ युवा हैं और इतनी बड़ी युवा शक्ति किसी भी देश के लिए बहुत बड़ी संपत्ति है। उनके मुताबिक यदि युवाओं को शिक्षा, रोजगार और अवसर मिलें तो वे देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सिस्टम युवाओं को एक तरह के ‘चक्रव्यूह’ में फंसा रहा है। उनका कहना था कि युवा शिक्षा हासिल करने के लिए पैसा और समय खर्च करते हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होते।
रोजगार के तीन रास्तों पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे को तीन प्रमुख क्षेत्रों से जोड़ते हुए कहा कि देश में मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप और सरकारी नौकरी के अवसरों पर संकट दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में पर्याप्त रोजगार पैदा नहीं हो रहे हैं। इसी तरह स्टार्टअप के क्षेत्र में भी युवाओं के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं। सरकारी नौकरियों में भर्ती की प्रक्रिया और पेपर लीक जैसी समस्याओं को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के लिए इन तीनों क्षेत्रों को मजबूत करने की जरूरत है।
'मेड इन इंडिया' को लेकर सरकार पर निशाना
कांग्रेस नेता ने अपने भाषण में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बाजार में चीन और कोरिया में बने उत्पाद आसानी से दिखाई देते हैं, लेकिन देश में बने उत्पादों की मौजूदगी उतनी मजबूत नजर नहीं आती।उन्होंने छोटे कारोबारियों और उद्यमियों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि छोटे कारोबारी स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करते हैं, लेकिन उन्हें वित्तीय सहायता और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों को आसानी से बड़े कर्ज उपलब्ध हो जाते हैं, जबकि छोटे व्यापारियों और कारोबारियों के लिए बैंक लोन हासिल करना मुश्किल होता है।
सोशल मीडिया को बताया '21वीं सदी का नशा'
राहुल गांधी ने युवाओं के बीच सोशल मीडिया और रील्स की बढ़ती लोकप्रियता पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युवाओं को लगातार रील देखने और बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।उन्होंने इसे ‘21वीं सदी का नशा’ बताते हुए युवाओं से अपने समय और ऊर्जा का इस्तेमाल देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण कामों में करने की बात कही।
पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में युवा परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं के कारण बहुत कम उम्मीदवार सफल हो पाते हैं।उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले युवाओं के लिए परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी और भरोसेमंद होनी चाहिए। पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ-साथ उनके परिवारों की उम्मीदों को भी प्रभावित करती हैं।
सरकारी संस्थानों और निजीकरण पर सवाल
राहुल गांधी ने सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि करीब एक दशक पहले सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराते थे, लेकिन अब निजीकरण के कारण इन क्षेत्रों में सरकारी रोजगार के अवसर कम हुए हैं।
उन्होंने बीएसएनएल समेत सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के निजीकरण का मुद्दा उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करने से युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं।प्रयागराज में आयोजित इस कार्यक्रम में राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी की बेटी मिराया वाड्रा भी मौजूद रहीं।
युवाओं को लेकर सियासी बहस तेज
प्रयागराज के इस कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी ने एक बार फिर युवाओं और रोजगार के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखा। उन्होंने शिक्षा, नौकरी, पेपर लीक, स्टार्टअप, छोटे कारोबार और सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार जैसे मुद्दों को एक साथ जोड़ते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी के बयान ऐसे समय में आए हैं जब देश में युवाओं के रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया और निजी क्षेत्र में अवसरों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। ऐसे में प्रयागराज में उनका भाषण युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।