नई दिल्ली। देशभर में मौसम की मार और लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच स्कूलों के सामने शैक्षणिक कैलेंडर को संतुलित रखने की चुनौती बढ़ती जा रही है। एक ओर शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम कार्यदिवस पूरे करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर भारी बारिश, बाढ़, गर्मी, सर्दी और स्थानीय त्योहारों के कारण कई बार स्कूलों को अतिरिक्त छुट्टियां घोषित करनी पड़ती हैं। ऐसे में स्कूलों के सामने छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई के निर्धारित दिनों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
RTE के तहत कितने कार्यदिवस जरूरी?
RTE के प्रावधानों के अनुसार, कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 200 कार्यदिवस और कक्षा 6 से 8 तक के लिए 220 कार्यदिवस निर्धारित हैं। हालांकि, पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान इन कार्यदिवसों को बनाए रखना कई बार मुश्किल हो जाता है। सार्वजनिक अवकाश, स्थानीय त्योहार, मौसमी परिस्थितियां और प्रशासन की ओर से घोषित आकस्मिक छुट्टियां स्कूलों के नियमित कैलेंडर को प्रभावित कर सकती हैं।
भारी बारिश से बढ़ी स्कूलों की परेशानी
हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में लगातार बारिश और जलभराव के कारण स्कूलों को बंद रखने या कक्षाओं के संचालन में बदलाव करने की स्थिति बनी है। दिल्ली-NCR समेत कई क्षेत्रों में खराब मौसम के दौरान छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर स्कूल बंद करने या ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने जैसे फैसले लिए जाते हैं। बारिश के कारण सड़कें जलमग्न होने, यातायात प्रभावित होने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने पर बच्चों का स्कूल पहुंचना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए स्कूल संचालन और विद्यार्थियों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी हो जाता है।
IMD अलर्ट भी स्कूलों के लिए चुनौती
स्कूलों के अकादमिक कैलेंडर पर असर केवल बारिश से ही नहीं पड़ता। गर्मी की लहर, बाढ़, घना कोहरा और अन्य प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियां भी स्कूलों को अतिरिक्त छुट्टी देने के लिए मजबूर कर सकती हैं। मौसम विभाग की ओर से जब किसी क्षेत्र में भारी बारिश या अन्य गंभीर मौसम की चेतावनी जारी की जाती है, तो स्थानीय प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों के संचालन को लेकर फैसला कर सकता है। इससे पहले से तय अकादमिक कैलेंडर में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
गर्मी और सर्दी की छुट्टियां भी असर डालती हैं
देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के अनुसार गर्मी और सर्दी की छुट्टियां पहले से ही स्कूल कैलेंडर का हिस्सा होती हैं। उत्तर भारत में अत्यधिक गर्मी के दौरान गर्मी की छुट्टियां बढ़ सकती हैं, जबकि सर्दियों में कड़ाके की ठंड, कोहरे और कम दृश्यता के कारण स्कूलों के समय में बदलाव या अतिरिक्त छुट्टी की स्थिति बन सकती है। इन परिस्थितियों में स्कूलों को उपलब्ध शिक्षण दिनों के भीतर पाठ्यक्रम पूरा करने की योजना बनानी पड़ती है।
त्योहारों से भी प्रभावित होता है स्कूल कैलेंडर
भारत में अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में स्थानीय त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के कारण भी स्कूलों में छुट्टियां रहती हैं। कई बार बड़े आयोजनों के दौरान यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन अतिरिक्त छुट्टी घोषित कर देता है। उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में कांवड़ यात्रा के दौरान स्कूलों के संचालन में बदलाव किया गया है। इसी तरह विभिन्न राज्यों में स्थानीय त्योहारों के कारण स्कूल कैलेंडर में छुट्टियां शामिल की जाती हैं।
स्कूलों के सामने पढ़ाई पूरी करने की चुनौती
अतिरिक्त छुट्टियों के कारण जब निर्धारित शिक्षण दिवस कम होते हैं, तो स्कूलों को पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए अपने अकादमिक प्लान में बदलाव करना पड़ सकता है। इसके लिए अतिरिक्त कक्षाएं, शेड्यूल में बदलाव या अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं का सहारा लिया जा सकता है।
हालांकि, स्कूलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि निर्धारित कार्यदिवस पूरे करने के साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में स्कूलों के अकादमिक कैलेंडर को अधिक लचीला बनाने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।