रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की गतिविधियां फिलहाल बनी हुई हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश हो रही है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से कुछ राहत मिल रही है। हालांकि बारिश का वितरण सभी संभागों में एक जैसा नहीं रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक सरगुजा और बस्तर संभाग को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य आंकड़े के आसपास पहुंच गई है।
आने वाले 24 घंटे मौसम के लिहाज से खास रहने वाले हैं। मौसम विभाग ने उत्तर सरगुजा संभाग के एक-दो जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं राज्य के बाकी हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं।
उत्तर सरगुजा में भारी बारिश की संभावना
झारखंड और उत्तर प्रदेश से लगे ऊपरी क्षेत्र में बने चक्रवाती सिस्टम का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर पड़ रहा है। इसी सिस्टम के प्रभाव से उत्तरी सरगुजा के कुछ इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।अगले 24 घंटे में उत्तर सरगुजा के एक-दो जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।बारिश के दौरान कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
छत्तीसगढ़ में सामान्य से 8 फीसदी कम बारिश
प्रदेश में मानसून की स्थिति का आकलन करें तो अब तक कुल बारिश सामान्य से 8 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। हालांकि अधिकांश संभागों में बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया है।बारिश की सबसे ज्यादा कमी सरगुजा संभाग में देखने को मिली है। यहां सामान्य से करीब 54 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में उत्तरी सरगुजा में अच्छी बारिश होने की संभावना इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।बस्तर संभाग में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से पीछे है, जबकि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में मानसून की गतिविधियों ने स्थिति को काफी हद तक संतुलित किया है।
सरगुजा में बारिश की कमी सबसे ज्यादा
सरगुजा संभाग में लंबे समय से सामान्य से कम बारिश होने के कारण यहां मानसून की सक्रियता पर विशेष नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक बनने वाले मौसमी सिस्टम के कारण संभाग के उत्तरी हिस्से में आने वाले दिनों में अच्छी बारिश हो सकती है।अगर भारी बारिश का यह दौर प्रभावी रहा तो सरगुजा क्षेत्र में बारिश की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है। हालांकि बारिश का वास्तविक आंकड़ा आने वाले दिनों में होने वाली वर्षा पर निर्भर करेगा।
छह जिलों में 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने राज्य के छह जिलों में तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है। महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर और कोरबा में हवा की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश की संभावना है। तेज हवा के दौरान पेड़ और बिजली के खंभे गिरने जैसी स्थिति से बचने के लिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
रायपुर-दुर्ग समेत 25 से ज्यादा जिलों में येलो अलर्ट
राजधानी रायपुर, दुर्ग समेत प्रदेश के 25 से अधिक जिलों के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में अचानक मौसम बदलने, बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, खेत या पेड़ के नीचे खड़े होने से बचना जरूरी है। विशेष रूप से बिजली गिरने की स्थिति में सुरक्षित भवन के अंदर रहना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
बारिश के बाद भी उमस से तुरंत राहत नहीं
प्रदेश में रुक-रुककर हो रही बारिश के बावजूद कई इलाकों में उमस की स्थिति बनी हुई है। इसकी वजह यह है कि बारिश के बीच लंबे अंतराल के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे चिपचिपी गर्मी महसूस होती है।मौसम विभाग के अनुसार तेज बारिश होने के बाद उमस से कुछ राहत मिलने की संभावना है। हालांकि बारिश थमने के बाद कुछ इलाकों में फिर से उमस महसूस हो सकती है।
24 घंटे बाद बढ़ सकता है तापमान
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले 24 घंटे के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। इस दौरान बारिश की गतिविधियां अलग-अलग इलाकों में बनी रह सकती हैं, इसलिए तापमान बढ़ने के बावजूद मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं होगा। बादल, बारिश और धूप के बीच तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
किसानों के लिए बारिश अहम
छत्तीसगढ़ में खरीफ फसलों के लिहाज से मानसून की बारिश बेहद महत्वपूर्ण है। जिन क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई है, वहां आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने से खेतों में नमी की स्थिति बेहतर हो सकती है।खासकर सरगुजा संभाग में बारिश की कमी को देखते हुए उत्तर क्षेत्र में संभावित भारी बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है। हालांकि बहुत ज्यादा बारिश होने की स्थिति में जलभराव और खेतों में अतिरिक्त पानी की समस्या भी पैदा हो सकती है।