नई दिल्ली - किचन में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 सितंबर 2026 को प्याज का अखिल भारतीय औसत थोक भाव 4,615.98 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 3,299.85 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी एक साल में थोक कीमत में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
एक साल में कितना बढ़ा प्याज का भाव?
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के प्राइस मॉनिटरिंग डेटा के अनुसार, 21 सितंबर को प्याज का थोक भाव 4,615.98 रुपये प्रति क्विंटल रहा। एक साल पहले यह 3,299.85 रुपये था। सरकारी आंकड़ों की गणना के अनुसार इस अवधि में थोक कीमत करीब 39.88 प्रतिशत बढ़ी है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 135 प्रतिशत का आंकड़ा एक साल की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि 21 मार्च 2026 की तुलना में थोक कीमत में दर्ज बढ़ोतरी को दर्शाता है। मार्च में प्याज का औसत थोक भाव 1,949.50 रुपये प्रति क्विंटल था।
महाराष्ट्र की फसल पर बारिश की मार
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आई हैं। महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज की फसल के दौरान हुई बेमौसम बारिश से गुणवत्ता और भंडारण क्षमता प्रभावित हुई। केंद्रीय एजेंसियों द्वारा खरीदे गए करीब 1.2 लाख टन प्याज के बफर स्टॉक में लगभग 30 प्रतिशत प्याज खराब होने की रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश के कारण प्याज में सड़ने और अंकुर निकलने की समस्या बढ़ी, जिससे लंबे समय तक भंडारण मुश्किल हुआ। एक अधिकारी ने इस साल नुकसान 40 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका भी जताई थी।
सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज निकालना शुरू किया
कीमतों पर नियंत्रण और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने अगस्त में बफर स्टॉक से प्याज की लक्षित बिक्री शुरू की थी। सरकार के मुताबिक, NCCF, NAFED और अन्य माध्यमों से प्याज को 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचने की व्यवस्था की गई थी। सरकार का कहना है कि वह देशभर में प्याज की कीमत, आवक और उपलब्धता पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत के मुताबिक बफर स्टॉक जारी करने का फैसला लिया जाएगा।
आगे क्या रहेगा प्याज का बाजार?
प्याज की कीमतों पर फिलहाल कई कारकों का असर है। एक तरफ कुछ इलाकों में मौसम और फसल से जुड़ी समस्याओं ने आपूर्ति को प्रभावित किया है, वहीं सरकार बफर स्टॉक के जरिए बाजार में प्याज की उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। इसलिए आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों की दिशा नई फसल की आवक, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और सरकारी हस्तक्षेप पर काफी हद तक निर्भर करेगी। फिलहाल सरकारी आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि पिछले एक साल में प्याज के थोक भाव में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।