शाजापुर: मध्य प्रदेश के शाजापुर शहर में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था प्रभावित हो गई है। अगस्त महीने का वेतन नहीं मिलने से नगरपालिका के तहत संचालित 13 कचरा वाहन चालकों ने काम रोक दिया है। सोमवार को भी चालक काम पर नहीं पहुंचे, जिसके चलते कई इलाकों में घरों से कचरा नहीं उठ सका। कचरा वाहनों के नहीं चलने से शहर के कई हिस्सों में कचरे के ढेर दिखाई देने लगे हैं। इससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और शहर की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अगस्त का वेतन अब तक नहीं मिला
कचरा वाहन चालकों का कहना है कि अगस्त का महीना बीत चुका है, लेकिन उन्हें अभी तक वेतन नहीं मिला है। चालकों के मुताबिक सितंबर के भी 21 दिन गुजर चुके हैं, इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। चालकों का आरोप है कि हर महीने वेतन मिलने में देरी की समस्या बनी रहती है। इसी के विरोध में उन्होंने वाहन नहीं चलाने का फैसला लिया है।
13 कचरा वाहनों का संचालन निजी कंपनी के पास
शाजापुर नगरपालिका ने शहर में कचरा संग्रहण के लिए 13 वाहनों के संचालन की जिम्मेदारी यूनिक वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, उज्जैन को दी है। इन वाहनों के माध्यम से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में घर-घर जाकर कचरा एकत्र किया जाता है। चालकों के काम पर नहीं आने के कारण इस व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।
कई इलाकों से नहीं उठा घरों का कचरा
सोमवार को कचरा वाहन नहीं चलने के कारण कई इलाकों में घरों से कचरा संग्रहण नहीं हो सका। नियमित रूप से कचरा उठाने वाले वाहन नहीं पहुंचने के कारण लोगों ने घरों का कचरा बाहर रखना शुरू कर दिया। कुछ स्थानों पर कचरा जमा होने से कचरे के ढेर नजर आने लगे हैं। इससे स्थानीय नागरिकों को दुर्गंध और गंदगी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
शहर में कचरा संग्रहण प्रभावित होने के बाद सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि वाहन लंबे समय तक नहीं चले तो कई इलाकों में कचरा जमा होने की स्थिति और गंभीर हो सकती है। वहीं, वाहन चालकों की मांग है कि उनका लंबित वेतन जल्द से जल्द जारी किया जाए, ताकि वे दोबारा काम शुरू कर सकें।
वेतन भुगतान में देरी को लेकर नाराजगी
चालकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब वेतन मिलने में देरी हुई है। उनके अनुसार, हर महीने भुगतान में देरी होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल कचरा वाहन चालकों के काम पर नहीं आने से शहर की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था प्रभावित है। मामले में नगरपालिका और संबंधित कंपनी की ओर से लंबित वेतन भुगतान को लेकर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर लोगों की नजर है।