महाराष्ट्र - महाराष्ट्र की राजनीति में कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ यानी गोकुल डेयरी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक स्थानीय सहकारी संस्था के बोर्ड में वर्चस्व की लड़ाई अब राज्य की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। इस विवाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी हस्तक्षेप करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जनादेश में मिलावट करने का आरोप लगाया है।
वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेता गोकुल डेयरी के मामले को राष्ट्रीय मुद्दा मानकर चल रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी के बाद यह विवाद और चर्चा में आ गया है।
गोकुल डेयरी के बोर्ड पर कब्जे को लेकर शुरू हुई लड़ाई
कोल्हापुर की गोकुल डेयरी महाराष्ट्र की प्रमुख सहकारी दूध संस्थाओं में गिनी जाती है। इसके बोर्ड में किस राजनीतिक खेमे का प्रभाव रहेगा, इसे लेकर लंबे समय से राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं। हाल ही में बोर्ड निदेशकों के चुनाव के बाद यह मुकाबला और दिलचस्प हो गया।
अक्टूबर में हुए चुनाव में कुल 25 निदेशकों वाले बोर्ड में कांग्रेस समर्थित पैनल ने 13 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिलीं। इस परिणाम के बाद कांग्रेस खेमे को बोर्ड में मामूली बहुमत मिलता दिखाई दिया। हालांकि, अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान परिस्थितियां बदल गईं और विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया।
अध्यक्ष पद के चुनाव में कैसे बिगड़ा पूरा मामला?
गोकुल डेयरी बोर्ड के अध्यक्ष के चयन के लिए 29 अक्टूबर को बैठक बुलाई गई थी। बताया गया कि महायुति समर्थित पैनल के 12 निदेशक इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके बाद सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले कांग्रेस समर्थित खेमे ने अलग से बैठक आयोजित की।
इस बैठक में शशिकांत पाटिल चुयेकर को गोकुल डेयरी बोर्ड का अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। कांग्रेस समर्थित पैनल ने इसे अपने बहुमत के आधार पर लिया गया फैसला बताया। लेकिन अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया को लेकर जल्द ही कानूनी और प्रशासनिक सवाल उठने लगे।
कोरम पूरा नहीं होने से प्रशासन ने नहीं दी मान्यता
इस पूरे विवाद में बैठक के कोरम का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण बन गया है। निर्धारित नियमों के मुताबिक, बोर्ड की बैठक को वैध तरीके से संचालित करने के लिए कम से कम 14 निदेशकों की मौजूदगी जरूरी थी।
चूंकि बैठक में आवश्यक संख्या में निदेशक मौजूद नहीं थे, इसलिए प्रशासन ने शशिकांत पाटिल चुयेकर के अध्यक्ष चुने जाने के फैसले को मान्यता देने से इनकार कर दिया। इसी प्रशासनिक फैसले के बाद कांग्रेस और महायुति के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया। कांग्रेस समर्थित खेमे का दावा बोर्ड में अपने बहुमत को लेकर है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया और जरूरी कोरम को आधार बनाया गया।
राहुल गांधी ने BJP पर लगाया जनादेश में मिलावट का आरोप
गोकुल डेयरी का विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बीजेपी पर जनादेश में मिलावट करने का आरोप लगाया। कांग्रेस की ओर से इस मामले को सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी जनादेश के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद यह स्थानीय सहकारी संस्था का विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े मुद्दे के रूप में उभर आया है।
फडणवीस ने राहुल गांधी पर कसा तंज
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उनका मजाक उड़ाया। नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राहुल गांधी गोकुल डेयरी के मामले को राष्ट्रीय मुद्दा मान रहे हैं।
फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि हाल के चुनावों में उनकी पार्टी को महज 3,000 से 4,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गोकुल डेयरी के निदेशकों की नियुक्ति से जुड़ा फैसला कानून के प्रावधानों के अनुसार लिया गया है।
सहकारी संस्था का विवाद बना राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई
गोकुल डेयरी का मामला अब केवल अध्यक्ष पद के चयन तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें कांग्रेस और महायुति दोनों की राजनीतिक प्रतिष्ठा जुड़ गई है। एक तरफ कांग्रेस समर्थित पैनल अपने चुनावी बहुमत का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक प्रक्रिया और कोरम के नियमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
राहुल गांधी और देवेंद्र फडणवीस की बयानबाजी ने इस विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया है। अब देखना होगा कि गोकुल डेयरी के बोर्ड का नेतृत्व किसके हाथ में जाता है और इस पूरे मामले में आगे क्या कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।