कोलकाता: पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास को गति देने और राज्य में निवेश का अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नई औद्योगिक नीति 'पश्चिम बंगाल निवेश प्रोत्साहन नीति, 2026' की घोषणा की। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में नए उद्योगों की स्थापना, मौजूदा उद्योगों का विस्तार, निवेश आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई औद्योगिक नीति में रोजगार सृजन को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। यह नीति 9 मई 2026 से प्रभावी होगी।
शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में राज्य मंत्रिमंडल के कई सदस्य और उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में तापस रॉय, स्वपन दासगुप्ता, अर्जुन सिंह, शंकर घोष, शारद्वत मुखोपाध्याय और मौमिता मिश्रा विश्वास सहित कई मंत्री उपस्थित थे। वहीं उद्योग जगत से हर्षवर्धन नेवटिया, संजय बुधिया, मयंक जालान, उमेश चौधरी, सीएस धानुका और रुद्र चटर्जी समेत कई प्रमुख उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया।
रोजगार सृजन पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर
नई औद्योगिक नीति के तहत कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति पर विशेष आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। राज्य सरकार कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा वापस करेगी। खास बात यह है कि महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों की नियुक्ति को बढ़ावा देने के लिए अधिक सहायता का प्रावधान किया गया है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) में महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए नियोक्ता के EPF योगदान का 100 प्रतिशत तक 10 वर्षों के लिए प्रतिपूर्ति की जाएगी। वहीं पुरुष कर्मचारियों के मामले में यह सहायता 50 प्रतिशत होगी।
200 से अधिक कर्मचारियों वाली सेवा इकाइयों में महिलाओं के लिए पांच वर्षों तक 75 प्रतिशत सहायता मिलेगी। बड़े उद्योगों और मेगा परियोजनाओं में भी रोजगार सृजन के आधार पर 50 प्रतिशत तक EPF सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल निर्माण पर भी राज्य सरकार अनुदान दे सकती है।
निवेश के आधार पर मिलेगी आर्थिक सहायता
नई नीति के तहत उद्योगों को प्लांट और मशीनरी में किए गए पात्र स्थायी पूंजी निवेश (FCI) के आधार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी। सामान्य औद्योगिक इकाइयों के लिए सहायता की अधिकतम सीमा निवेश का 100 प्रतिशत तय की गई है।
थ्रस्ट सेक्टर और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थापित इकाइयों के लिए यह सीमा 110 प्रतिशत होगी। वहीं प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में थ्रस्ट सेक्टर के उद्योगों को निवेश का 120 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिल सकता है।
सहायता की अवधि अधिकतम 10 वर्ष या निर्धारित सीमा तक होगी। इनमें से जो शर्त पहले पूरी होगी, उसी के आधार पर सहायता समाप्त हो जाएगी। सेवा क्षेत्र की इकाइयों के लिए पांच वर्षों तक सहायता का प्रावधान है।
किन उद्योगों को मिलेगा फायदा?
इस नीति के दायरे में MSME, बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान, रणनीतिक और मेगा परियोजनाएं, आईटी, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, वित्तीय सेवाएं और शिक्षा क्षेत्र की इकाइयां शामिल होंगी। इसके अलावा मौजूदा उद्योगों के विस्तार और विविधीकरण को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। बीमार और बंद औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू करने के लिए भी विशेष सहायता उपलब्ध कराने की योजना है।
सेमीकंडक्टर से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन तक थ्रस्ट सेक्टर में शामिल
राज्य सरकार ने भविष्य की जरूरतों और आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए कई क्षेत्रों को थ्रस्ट सेक्टर में शामिल किया है। इनमें सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन, वेस्ट-टू-एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती डिजिटल तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र उद्योग, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मा, चिकित्सा उपकरण, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट, स्पेशियलिटी स्टील, पेट्रोकेमिकल्स, विमानन और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निवेश करने वाली औद्योगिक इकाइयों को सामान्य उद्योगों की तुलना में अधिक प्रोत्साहन दिया जाएगा।
पिछड़े औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश करने पर अतिरिक्त लाभ
पश्चिम बंगाल के कम औद्योगिक विकास वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता सूची में शामिल किया जाएगा। इन क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने वाली कंपनियों को अधिक आर्थिक सहायता और EPF प्रतिपूर्ति के लिए अपेक्षाकृत कम रोजगार संबंधी शर्तों का लाभ मिलेगा। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की सूची की प्रत्येक तीन वर्ष में समीक्षा की जाएगी।
उद्योगों को मिलेंगी कई तरह की रियायतें
नई नीति के तहत विनिर्माण और अन्य औद्योगिक इकाइयों को SGST के तहत वित्तीय सहायता, पांच वर्षों तक बिजली शुल्क की प्रतिपूर्ति, जमीन खरीदने पर स्टांप ड्यूटी की वापसी और अनुसंधान एवं विकास के लिए सहायता मिलेगी। MSME इकाइयों को कर्ज के ब्याज और नई तकनीक अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सेवा क्षेत्र की इकाइयों को पांच वर्षों तक SGST, EPF और बिजली शुल्क में सहायता के साथ किराये पर ली गई जगह के लिए भी आर्थिक सहयोग मिल सकता है। हालांकि, सेवा इकाइयां विनिर्माण इकाइयों के लाभ और किराया सहायता का एक साथ लाभ नहीं ले सकेंगी।
बड़े निवेश और सामाजिक संस्थानों के लिए विशेष प्रावधान
रणनीतिक और मेगा परियोजनाओं को परियोजना के आधार पर विशेष प्रोत्साहन दिया जा सकता है। इसके लिए निवेश की मात्रा, रणनीतिक क्षेत्र में परियोजना की स्थिति और प्रति एकड़ कम से कम 50 रोजगार सृजन जैसे मानदंड निर्धारित किए गए हैं। बड़ी परियोजनाओं को सड़क, पानी और बिजली कनेक्टिविटी के लिए भी सहायता मिल सकती है।
इसके अलावा गैर-लाभकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। ऐसी संस्थाओं को राज्य में कम से कम 100 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा और 10 वर्षों तक निर्धारित वर्गों के लिए अपनी सेवा क्षमता का कम से कम 25 प्रतिशत उपलब्ध रखना होगा। इसके बदले उन्हें 100 प्रतिशत तक स्टांप ड्यूटी में छूट, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव की फीस से राहत और नेट मीटरिंग जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।
आवेदन से भुगतान तक तय होगी समयसीमा
सरकार ने औद्योगिक सहायता की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का दावा किया है। इसके लिए सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था होगी।
- आवेदन के 30 दिनों के भीतर सर्टिफिकेट ऑफ इंटेंट (CoI) जारी करने का लक्ष्य है।
- उत्पादन शुरू होने के बाद 45 दिनों में सर्टिफिकेट ऑफ एलिजिबिलिटी (CoE) जारी किया जाएगा।
- सहायता का दावा मंजूर होने के 30 दिनों के भीतर राशि सीधे संबंधित औद्योगिक इकाई के बैंक खाते में भेजने का प्रावधान है।
- बड़ी परियोजनाओं के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे और मुख्य सचिव हर महीने समीक्षा करेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नीति में भविष्य में होने वाले संशोधनों से पहले से स्वीकृत प्रोत्साहनों में कटौती नहीं की जाएगी। आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया को अधिक से अधिक फेसलेस बनाया जाएगा।
वसूली और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
औद्योगिक नीति की घोषणा के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने उद्योग जगत को भरोसा दिलाने के साथ-साथ वसूली और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख भी अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में किसी भी तरह की वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कोई वसूली करता है तो 15 मिनट के भीतर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने टोल प्लाजा के आसपास पहले से चल रही कथित अवैध गतिविधियों को बंद करने की बात कही। उन्होंने बताया कि कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ ED या CBI की चार्जशीट है या जिन्होंने बैंकों के साथ धोखाधड़ी की है, उनके साथ सरकार किसी तरह का व्यावसायिक संबंध नहीं रखेगी।
उद्योगों की सुरक्षा और निवेशकों का भरोसा सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने राज्य के औद्योगिक विकास की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी फिलहाल महज 5 प्रतिशत है। सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है। इसी उद्देश्य से बजट से पहले ही मंत्रिमंडल ने नई औद्योगिक नीति को लागू करने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नई नीति केवल नए उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों पर भी लागू होगी। सरकार का लक्ष्य पश्चिम बंगाल को एक विकसित राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने वादे के मुताबिक काम करके दिखाएंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। व्यापारियों और आम लोगों के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।