कोलकाता: पश्चिम बंगाल में उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। B.Ed, ITI, फार्मा और पॉलिटेक्निक संस्थानों के बुनियादी ढांचे और पढ़ाई की गुणवत्ता की जांच के बाद कई संस्थानों में नए दाखिलों पर रोक लगाई गई है। उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने बताया कि यह कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता बनाए रखने और केवल डिग्री बांटने वाले संस्थानों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की जा रही है।
शिक्षा को कारोबार नहीं बनने देंगे: सरकार
मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री स्वयं विकास भवन पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया था कि शिक्षा को किसी भी कीमत पर व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा और शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। इसी निर्देश के तहत उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण कराया।
451 B.Ed कॉलेज पहले चरण में गुणवत्ता जांच में पिछड़े
मंत्री के अनुसार, पहले चरण के निरीक्षण के बाद 156 B.Ed कॉलेजों को 2026-28 शैक्षणिक सत्र में दाखिले की अनुमति दी गई थी। वहीं, 451 कॉलेज निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर सके। इन संस्थानों को 21 दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी कर बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार करने का निर्देश दिया गया।
इन 451 कॉलेजों में से 9 संस्थानों ने दोबारा विभाग से संपर्क नहीं किया। शेष 442 कॉलेजों के जवाब मिलने के बाद दूसरे चरण का निरीक्षण कराया गया।
दूसरे निरीक्षण में 237 कॉलेजों को मिली मंजूरी
दूसरे चरण की जांच में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पहले चरण में निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को दोबारा नहीं भेजा गया। इस बार दूसरे निरीक्षकों की टीम ने कॉलेजों की स्थिति का आकलन किया।
इस जांच में 237 B.Ed कॉलेज गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे। इन्हें 4 नवंबर को 2026-28 शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों के दाखिले की अनुमति दे दी गई। हालांकि, 205 कॉलेज अभी भी निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पाए हैं।
205 कॉलेजों को सुधार का एक और मौका
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन 205 कॉलेजों की मान्यता समाप्त नहीं की जा रही है। उन्हें इस शैक्षणिक सत्र के दौरान अपने बुनियादी ढांचे, फैकल्टी, छात्र संख्या और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सुधार करने का अवसर दिया गया है। यदि ये संस्थान आवश्यक मानकों को पूरा कर लेते हैं, तो अगले शैक्षणिक सत्र में उन्हें फिर से दाखिले की अनुमति मिल सकती है।
14 ITI और 38 फार्मा कॉलेजों में दाखिले पर रोक
B.Ed कॉलेजों के अलावा तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों की भी जांच की गई। इसके तहत कुल 265 ITI संस्थानों में से 14 को आवश्यक बुनियादी ढांचा नहीं होने के कारण मौजूदा शैक्षणिक सत्र में छात्रों का दाखिला बंद करना पड़ा है। वहीं, राज्य के कुल 134 फार्मा कॉलेजों में से 38 कॉलेजों में इस शैक्षणिक सत्र के लिए नए दाखिले रोक दिए गए हैं।
एक पॉलिटेक्निक भी दाखिले की दौड़ से बाहर
राज्य में मौजूद 74 पॉलिटेक्निक संस्थानों की जांच के बाद एक संस्थान को भी मौजूदा शैक्षणिक सत्र में छात्रों के दाखिले की अनुमति नहीं दी गई है।
कार्रवाई नहीं, सुधार का अवसर है: उच्च शिक्षा मंत्री
जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी शिक्षण संस्थान को दंडित करना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को सुरक्षित रखने की पहल है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षण संस्थानों को डिग्री बांटने की दुकान नहीं बनने दिया जा सकता। जिन कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों और पढ़ाई की व्यवस्था में कमियां हैं, उन्हें सुधार करना होगा। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को अगले शैक्षणिक सत्र में दोबारा दाखिले की अनुमति दी जाएगी।