कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पर्यटन को व्यवस्थित करने और होमस्टे कारोबार में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल की है। पर्यटन विभाग की ओर से गुरुवार को होमस्टे रजिस्ट्रेशन पोर्टल की आधिकारिक शुरुआत की गई। राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने इस पोर्टल को लॉन्च करते हुए स्पष्ट किया कि अब होमस्टे कारोबार को नियमानुसार पंजीकृत करना होगा। बिना रजिस्ट्रेशन होमस्टे के नाम पर कारोबार करने वालों पर लगाम लगाने के साथ-साथ सरकार अब पर्यटकों को मिलने वाली सुविधाओं और सेवाओं की गुणवत्ता पर भी नजर रखेगी।
5,479 होमस्टे पंजीकृत, पर्यटन विभाग के पास सिर्फ 2,679 का रिकॉर्ड
पर्यटन मंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल में फिलहाल 5,479 होमस्टे पंजीकृत हैं, जबकि पर्यटन विभाग के पास इनमें से 2,679 होमस्टे का ही रजिस्ट्रेशन दर्ज है। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे होमस्टे भी संचालित हो रहे हैं, जिनका कोई आधिकारिक पंजीकरण नहीं है। कई लोग बिना रजिस्ट्रेशन के ही होमस्टे का बोर्ड लगाकर कारोबार कर रहे हैं। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने नई ऑनलाइन व्यवस्था तैयार की है।
ऑनलाइन अपलोड होंगे दस्तावेज, पोर्टल से डाउनलोड होगा सर्टिफिकेट
नए पोर्टल के माध्यम से होमस्टे संचालक अपने जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद प्रमाणपत्र भी पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा। इस सर्टिफिकेट को होमस्टे परिसर में प्रदर्शित करना होगा, ताकि पर्यटकों को उसकी वैधता की जानकारी मिल सके।
बिना सर्टिफिकेट होमस्टे के रूप में संचालन पर रोक
शंकर घोष ने बताया कि प्रत्येक जिले में इस संबंध में एक SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) भेजा जाएगा। इसके तहत होमस्टे के रूप में अपनी संपत्ति का प्रचार करने वाले संचालकों के पास वैध रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट होना अनिवार्य होगा। बिना प्रमाणपत्र किसी भी संपत्ति को आधिकारिक होमस्टे के रूप में संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सिर्फ रजिस्ट्रेशन नहीं, सुविधाओं की गुणवत्ता पर भी रहेगी नजर
सरकार की योजना केवल होमस्टे का पंजीकरण करने तक सीमित नहीं है। पर्यटन मंत्री के मुताबिक, होमस्टे संचालक पर्यटकों से जिन सुविधाओं और सेवाओं का वादा करते हैं, उनकी वास्तविकता की भी निगरानी की जाएगी। इसमें कमरे की गुणवत्ता, साफ-सफाई, खानपान, स्थानीय संस्कृति, पर्यटन स्थलों की जानकारी और आतिथ्य सेवाएं शामिल होंगी। इसके अलावा होमस्टे में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।
WTTCL की बुकिंग वेबसाइट होगी दोबारा लॉन्च
पर्यटन मंत्री ने मौजूदा WTTCL (West Bengal Tourism Development Corporation Limited) बुकिंग वेबसाइट की खराब कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई पर्यटकों ने वेबसाइट पर बुकिंग के दौरान बार-बार एरर आने की शिकायत की है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए WTTCL के MD को वेबसाइट दोबारा लॉन्च करने का निर्देश दिया गया है।
मंत्री के अनुसार, कुछ ही दिनों में संशोधित बुकिंग वेबसाइट शुरू की जाएगी। इसमें एक ओर सरकारी पर्यटन संपत्तियों की बुकिंग की सुविधा होगी, वहीं दूसरी ओर रजिस्टर्ड होमस्टे की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। पर्यटक इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से होमस्टे की जानकारी लेकर बुकिंग कर सकेंगे।
होमस्टे के मालिक और किरायेदार को लेकर क्या है नियम?
प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर बंगाल में होमस्टे के स्वामित्व को लेकर भी सवाल उठाया गया। पूछा गया कि कई जगहों पर संपत्ति का मालिक कोई और होता है, जबकि होमस्टे का संचालन किरायेदार या कोई दूसरा व्यक्ति करता है। इस पर शंकर घोष ने कहा कि सरकार मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। उन्होंने यह भी बताया कि योजना लागू करने से पहले विभिन्न पक्षों से सुझाव और प्रस्ताव लिए गए हैं और आगे की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
WTTCL के 40 बंगलों का होगा कायाकल्प, जनवरी तक लक्ष्य
पर्यटन मंत्री ने राज्य की सरकारी पर्यटन संपत्तियों की स्थिति सुधारने की योजना भी साझा की। उन्होंने बताया कि WTTCL के अंतर्गत कुल 40 बंगले और पर्यटन संपत्तियां हैं, जिनका कायाकल्प किया जाना है। इनमें से 18 संपत्तियों के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि, सरकारी निर्माण कार्यों में जरूरी आधिकारिक प्रक्रियाओं के कारण थोड़ा समय लग सकता है। मंत्री ने उम्मीद जताई कि दिसंबर-जनवरी के दौरान काम पूरा करने की दिशा में प्रगति होगी और जनवरी तक सभी संपत्तियों के कायाकल्प का लक्ष्य रखा गया है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल सरकार की इस नई पहल का मकसद होमस्टे कारोबार को कानूनी दायरे में लाना, पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देना और सरकारी पर्यटन संपत्तियों को फिर से आकर्षक बनाना है। अब देखना होगा कि नई डिजिटल व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।