लेह: शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार विवाद उनके संस्थान हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) से जुड़े डेजर्ट फ्लावर स्कूल को लेकर है। लद्दाख प्रशासन ने स्कूल में कक्षाएं और अन्य गतिविधियां रोकने का निर्देश दिया है। प्रशासन की इस कार्रवाई पर सोनम वांगचुक ने कड़े सवाल उठाते हुए इसे अपने संस्थान को निशाना बनाने की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि जिस शैक्षणिक मॉडल को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली, उसी को बंद करने की कोशिश क्यों की जा रही है?
क्या है पूरा मामला? स्कूल की गतिविधियां रोकने का निर्देश
लद्दाख प्रशासन के लेह तहसीलदार कार्यालय ने 1 नवंबर 2026 को HIAL की सह-संस्थापक और सीईओ डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो को नोटिस जारी किया। इसमें फियांग स्थित डेजर्ट फ्लावर स्कूल में कक्षाएं और अन्य गतिविधियां शुरू करने पर आपत्ति जताई गई है।
प्रशासन का कहना है कि स्कूल में संबंधित विभागों से जरूरी अनुमति, मंजूरी और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त किए बिना शैक्षणिक गतिविधियां शुरू कर दी गईं। प्रशासन ने संस्थान को निर्देश दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में लंबित मामले पर अंतिम फैसला आने तक स्कूल की गतिविधियों को आगे न बढ़ाया जाए और यथास्थिति बनाए रखी जाए।
46 बच्चों का भविष्य दांव पर, 2 नवंबर से शुरू हुई थीं कक्षाएं
इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों का भविष्य है। सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो के मुताबिक, डेजर्ट फ्लावर स्कूल में 2 नवंबर से किंडरगार्टन की कक्षाएं शुरू की गई थीं। यहां शुरुआती चरण में 46 बच्चों का दाखिला हुआ है।
गीतांजलि आंगमो ने बताया कि स्कूल पिछले साल ही तैयार हो गया था और शिक्षकों की नियुक्ति भी कर ली गई थी। हालांकि, सितंबर 2025 में लद्दाख में हुई घटनाओं के कारण स्कूल शुरू करने की योजना टालनी पड़ी। इस साल नवंबर में नया शैक्षणिक सत्र शुरू करने का फैसला लिया गया था।
उनका कहना है कि कई अभिभावक पिछले दो वर्षों से अपने बच्चों के दाखिले का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में कक्षाएं शुरू होने के बाद प्रशासन की ओर से नोटिस जारी होना बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
1,076 कनाल जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद
दरअसल, इस पूरे मामले की जड़ HIAL को आवंटित जमीन का विवाद है। मई 2018 में लद्दाख प्रशासन ने फियांग थांग इलाके में संस्थान को 1,076 कनाल और एक मरला जमीन 40 वर्षों की लीज पर आवंटित करने की मंजूरी दी थी। इस जमीन पर हिमालयी क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप वैकल्पिक शिक्षा और सतत विकास पर आधारित विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना थी।
हालांकि, 21 अगस्त 2025 को लद्दाख प्रशासन ने जमीन का आवंटन रद्द कर दिया। प्रशासन का आरोप था कि संस्थान ने निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया, लीज से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं और प्रस्तावित विश्वविद्यालय की स्थापना भी नहीं की। इसके बाद HIAL ने इस फैसले को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है।
प्रशासन के आरोपों पर HIAL का जवाब क्या है?
लद्दाख प्रशासन ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में दावा किया है कि जमीन आवंटन की शर्तों के तहत निर्धारित समय में प्रीमियम और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं। प्रशासन के अनुसार, लीज डीड निष्पादित नहीं होने के कारण जमीन का आवंटन मई 2019 में ही समाप्त हो गया था।
वहीं, HIAL इन आरोपों को खारिज करता है। गीतांजलि आंगमो का कहना है कि जमीन आवंटित होने के महज 15 दिनों के भीतर यानी 20 मई 2018 को ही लीज डीड के लिए आवेदन कर दिया गया था। इसके बाद भी संस्थान ने कई बार प्रशासन से संपर्क किया।
सोनम वांगचुक का दावा है कि उन्होंने लीज डीड के लिए पांच लिखित आवेदन दिए, अधिकारियों से 15 बार मुलाकात की और करीब 30 बार फोन किया। उनका कहना है कि लीज प्रक्रिया में देरी संस्थान की वजह से नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर हुई।
सोनम वांगचुक ने क्यों कहा- यह 'विच हंट' है?
4 नवंबर को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक ने प्रशासन की कार्रवाई को 'विच हंट' यानी चुन-चुनकर निशाना बनाने की कोशिश बताया। उनका आरोप है कि लद्दाख में लोकतंत्र, स्थानीय अधिकारों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे उठाने के कारण उन्हें और उनके संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब लद्दाख में शिक्षा और विकास के लिए काम करने वाले संस्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, तो उसे आगे बढ़ने से क्यों रोका जा रहा है?
वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल के लिए ऐसी मंजूरियां और शर्तें मांगी जा रही हैं, जिनका संबंधित नीतियों में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उनके मुताबिक, प्रशासन की ओर से पहले भी लीज प्रक्रिया लंबित रहने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
जिस मॉडल को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान, उसी पर उठे सवाल
सोनम वांगचुक ने अपने संस्थान के शैक्षणिक मॉडल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि HIAL के काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।
उनके मुताबिक, भारत की संसद की शिक्षा संबंधी समिति ने संस्थान के मॉडल को देश के अन्य हिस्सों में भी अपनाने की सिफारिश की थी। इसके अलावा, संस्थान से जुड़े प्रोजेक्ट्स को TIME मैगजीन की TIME100 Climate Solutions सूची में जगह मिली है। लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम में भी इससे जुड़े काम को स्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया है।
वांगचुक का सवाल है कि जिस संस्थान के मॉडल को दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पर पेश किया गया, उसके स्कूल की गतिविधियों पर रोक लगाने की नौबत क्यों आ गई?
अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल डेजर्ट फ्लावर स्कूल को लेकर प्रशासन और HIAL के बीच विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ प्रशासन जरूरी मंजूरियों और जमीन आवंटन की शर्तों का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ सोनम वांगचुक और गीतांजलि आंगमो इसे संस्थान के काम में बाधा डालने की कोशिश बता रहे हैं।
इस पूरे विवाद का कानूनी पहलू अब हाईकोर्ट के फैसले से जुड़ा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या डेजर्ट फ्लावर स्कूल में पढ़ाई जारी रह पाएगी या बच्चों को अपनी पढ़ाई के लिए किसी दूसरे विकल्प की तलाश करनी होगी? फिलहाल इस मामले में अदालत के अगले निर्देशों का इंतजार है।