कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA) को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 30 नवंबर 2026 तक शेष बकाया DA का भुगतान करने की घोषणा की है। इसके लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। लेकिन इस घोषणा के बीच ग्रांट-इन-एड यानी सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों के मन में भी अपने बकाया भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या उन्हें भी इसी समय-सीमा के भीतर भुगतान मिलेगा या इसके लिए अलग व्यवस्था लागू होगी? आइए समझते हैं पूरा मामला।
30 नवंबर तक 4,000 करोड़ रुपये के भुगतान का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 4 नवंबर को नवान्न में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि सरकारी कर्मचारियों के कुल 12,000 करोड़ रुपये के बकाया DA में से लगभग 8,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष 4,000 करोड़ रुपये का भुगतान 30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह भुगतान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुला भुगतान का रास्ता
बकाया DA का विवाद लंबे समय से पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच चल रहा था। यह मामला अप्रैल 2008 से दिसंबर 2019 तक की अवधि के महंगाई भत्ते से जुड़ा है। 5 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए DA को उनका कानूनी अधिकार माना था।
इसके साथ ही बकाया राशि और भुगतान की प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति बनाई गई। अब इसी समिति की निगरानी में भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
ग्रांट-इन-एड कर्मचारियों के लिए भी शुरू हुई प्रशासनिक तैयारी
इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्रांट-इन-एड संस्थानों के कर्मचारी हैं। इनमें सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, पंचायत, नगरपालिका, नगर निगम, सांविधिक निकायों और सरकारी उपक्रमों से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
राज्य के वित्त विभाग ने 13 मार्च 2026 को ज्ञापन संख्या 998-F(P2) जारी कर अप्रैल 2008 से दिसंबर 2019 तक के DA और DR बकाए का विवरण तैयार करने का निर्देश दिया था। इसमें संबंधित विभागों से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन तथा पहले दिए गए महंगाई भत्ते का प्रमाणित रिकॉर्ड जुटाने को कहा गया था।
अगस्त में भी आगे बढ़ी थी भुगतान की प्रक्रिया
ग्रांट-इन-एड कर्मचारियों के बकाए को लेकर अगस्त 2026 में प्रशासनिक स्तर पर एक और पहल की गई। संबंधित विभागों को अपने वेतन पोर्टल पर बकाया DA बिल जमा करने के लिए अलग व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के बकाए का सही हिसाब तैयार करना और भुगतान की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।
हालांकि, इन कर्मचारियों के भुगतान की प्रक्रिया सरकारी कर्मचारियों के बकाए से अलग प्रशासनिक व्यवस्था के तहत आगे बढ़ रही है।
क्या ग्रांट-इन-एड कर्मचारियों को भी 30 नवंबर तक मिलेगा DA?
यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। मुख्यमंत्री की 30 नवंबर वाली घोषणा में 4,000 करोड़ रुपये के शेष भुगतान का उल्लेख राज्य सरकारी कर्मचारियों के बकाया DA के संदर्भ में किया गया है। ग्रांट-इन-एड संस्थानों के कर्मचारियों के लिए इसी तारीख तक भुगतान पूरा करने की कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।
वित्त विभाग के मार्च के ज्ञापन के अनुसार, संबंधित प्रशासनिक विभागों को पहले कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का प्रमाणित रिकॉर्ड तैयार करना है। इसके बाद वित्त विभाग की सहमति से भुगतान की प्रक्रिया और तौर-तरीके तय किए जाने हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों को भुगतान की तारीख और किस्तों को लेकर अगले आधिकारिक निर्देशों का इंतजार है।
14 दिसंबर को भी अहम बैठक पर रहेंगी निगाहें
बकाया DA के मामले में जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली निगरानी समिति की अगली गतिविधियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। मुख्यमंत्री के 4 नवंबर के बयान के मुताबिक, समिति 14 दिसंबर को कोलकाता आएगी। राज्य सरकार की ओर से समिति के सामने अपना पक्ष और जरूरी विवरण भी प्रस्तुत किया गया है।
फिलहाल 30 नवंबर सरकारी कर्मचारियों के शेष 4,000 करोड़ रुपये के DA भुगतान के लिए निर्धारित समय-सीमा है। वहीं, ग्रांट-इन-एड कर्मचारियों के लिए प्रशासनिक तैयारी शुरू होने के बावजूद भुगतान की अंतिम तारीख स्पष्ट नहीं है। ऐसे में हजारों कर्मचारियों और उनके संगठनों की नजर अब राज्य सरकार के अगले आदेश पर टिकी हुई है।