धर्म डेस्क | हिंदू धर्म में दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज के साथ इसका समापन होता है। आमतौर पर दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है, जिसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर उन्हें तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। हालांकि, साल 2026 में गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन नहीं, बल्कि दो दिन बाद मनाई जाएगी। इस बार दिवाली 8 नवंबर को है, जबकि गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को होगी। इसकी वजह कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि और उदया तिथि का नियम है।
कब है गोवर्धन पूजा 2026?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। साल 2026 में प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी पर्व की तारीख निर्धारित करने में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है। यानी सूर्योदय के समय जो तिथि मौजूद होती है, उसे उस दिन के लिए मान्यता दी जाती है। इस बार 10 नवंबर को सूर्योदय के समय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि मौजूद रहेगी। इसी कारण उदया तिथि के नियम के अनुसार गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को मनाई जाएगी।
गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह के समय पूजा करना शुभ माना जाता है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार इस बार पूजा का सुबह का मुहूर्त इस प्रकार है:
- गोवर्धन पूजा की तारीख: 10 नवंबर 2026, मंगलवार
- सुबह का पूजा मुहूर्त: सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक
- मुहूर्त की अवधि: 2 घंटे 10 मिनट
- ध्यान दें कि पूजा के मुहूर्त में शहर के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।
क्यों मनाई जाती है गोवर्धन पूजा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की एक लीला से जुड़ा है। कहा जाता है कि द्वापर युग में गोकुल और वृंदावन के लोग अच्छी वर्षा और फसल के लिए देवराज इंद्र की पूजा करते थे। एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों को समझाया कि उन्हें इंद्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि गोवर्धन पर्वत से पशुओं को चारा और लोगों को जीवनयापन के लिए जरूरी संसाधन मिलते हैं। श्रीकृष्ण की बात मानकर गांववालों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की।
इससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने गोकुल में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। लगातार बारिश से गांव में संकट पैदा हो गया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी गोकुलवासियों को उसके नीचे आश्रय दिया। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाए रखा। आखिरकार देवराज इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। इसी घटना की याद में हर साल गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है।